मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना से धन वर्षा होगी ज्योतिर्विद पं. सोमेश्वर जोशी

इस बार दीपावली पर समृद्धि और सामर्थ्य प्रदान करने वाला आयुष्मान-सौभाग्य और स्वाति नक्षत्र का मंगलकारी त्रिवेणी संयोग बनने जा रहा है। इस संयोग में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना से धन वर्षा होगी। इसका सकारात्मक असर लंबी अवधि तक रहेगा। इस दौरान कई विशिष्ट संयोग भी बनेंगे।

लक्ष्मी पूजा का समय :

लाभ – उन्नति

सुबह 06:45 से 08:07 तक

अमृत – सर्वोत्तम

सुबह 08:07 से 09:29 तक

शुभ – उत्तम

सुबह 10:52 से 12:14 तक

चर – सामान्य

दोपहर 02:59 से 04:21 तक

लाभ – उन्नति

सांय 04:21 से 05:44 तक

शुभ – उत्तम

रात्रि 07:21 से 08:59 तक

अमृत – सर्वोत्तम

रात्रि 08:59 से 10:37 तक

चर – सामान्य

रात्रि 10:37 से 12:14 तक

स्थिर लग्न मुहूर्त:

वृश्चिक लग्न सुबह 07:27 से 09:44 तक

कुम्भ लग्न दोपहर 1:34 से 03:06 तक

वृषभ लग्न रात्रि 06:14 से 08:11 तक

सिंह लग्न 12:41 से 2:57 तक

महानिशा काल मध्यरात्रि 11:44 से 12:36 तक

विशेष: रोग राहु वेला होने से बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नही होता। सांय उद्वेग के साथ वृषभ लग्न होने से उद्वेग समय के बाद पूजा करे।

स्वाति नक्षत्र में मनेगी दिपावली-

ज्योतिर्विद पं. सोमेश्वर जोशी के अनुसार कार्तिक अमावस्या की शुरुआत छह नवंबर को रात 10.26 पर लगेगी, जो अगले दिन बुधवार रात 9.31 तक रहेगी। इस दिन स्वाति नक्षत्र शाम 7.36 बजे तक रहेगा। इसके बाद विशाखा नक्षत्र लगेगा। आयुष्मान योग छह नवंबर को शाम 7.56 से अगले दिन 5.57 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग लगेगा, जो आठ नवंबर को शाम 4.23 मिनट तक रहेगा। जिस सूर्योदय और प्रदोषकाल में कार्तिक अमावस्या हो, उस दिन दीपावली मनाना शास्त्र सम्मत होता है।

इस बार विशेष होगी दीपावली

ज्योतिषाचार्य पं. जोशी के अनुसार दीपावली पर बन रहा त्रिवेणी संयोग बेहद विशेष है। कहा जाता है कि आयुष्मान योग में किए कार्य लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करते हैं और जीवनभर सुख प्राप्त होता है। दूसरा सौभाग्य प्रदान करने वाला सौभाग्य योग है। यह योग सदा मंगल करने वाला है। नाम के अनुरूप यह भाग्य को उदय करने वाला माना जाता है। स्वाति 15वां नक्षत्र है। इसका स्वामी राहु यानी अंधकार है। कहा जाता है कि जिस प्रकार स्वाति नक्षत्र में ओस की बूंद सीप पर गिरती है तो मोती बनती है, ठीक उसी प्रकार इस नक्षत्र में जातक की ओर से किया कार्य उसे सफलता की चमक प्रदान करता है।

दिवाली पर दुलर्भ संयोग-

दीपावली पर 59 साल बाद गुरु और शनि का दुर्लभ योग भी बन रहा है। साल 2018 से पहले वर्ष 1959 में एक नवंबर को दीपावली पर गुरु वृश्चिक में, शनि धनु राशि में था। शनि ग्रह गुरु के स्वामत्वि वाली राशि धनु में रहेगा। ये तीनों ग्रह एक – दूसरे की राशि में रहेंगे। दीपावली पर गुरु ग्रह मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में रहेगा। मंगल ग्रह शनि के स्वामत्वि वाली कुंभ राशि में रहेगा।

यह करे विशेष:

वैसे तो दीपावली अपने आप में बहुत विशेष है यह महासिद्ध रात्रि होती है इस महारात्रि में जोभी आद्यात्मिक कार्य किया जाता है वह सिद्धि दायक होता है और उसका महालाभ वर्षपर्यंत रहता है इसदिन विशेष कर दीप, गणपति, सरस्वती, लक्ष्मी पूजन विधिविधान से षोडशोपचार में विशेष कर रक्तचंदन, नीलकमल, बिल्वपत्र अंगपूजा अष्टलक्ष्मी पूजन कर श्रीसूक्त ओर कनकधारा, गोपालसहस्त्र, विष्णुसहस्त्र नाम का पाठ रात्रिपर्यंत करें।

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