सिर पर पल्लू, हाथ में बच्चा, मेट्रो में महिला पॉकेटमार करती है चोरी

नई दिल्ली । सीआईएसएफ ने दिल्ली मेट्रो में चोरियां रोकने के लिए खास मुहिम चलाई, जिसके बाद २०१७ के मुकाबले २०१८ में इस तरह की वारदातों में भारी कमी आई। २०१७ में जहां १,३९२ चोरी के मामले दर्ज किए थे, वहीं साल २०१८ में मेट्रो में चोरी के ४९७ केस दर्ज किए है। इन आंकड़ों में से एक आंकड़ा चौंकाने वाला है। साल २०१७ के मुकाबले साल २०१८ में महिला चोरों की संख्या में इजाफा देखा गया। २०१७ में जहां कुल मामलों में महिला पॉकेटमारों की संख्या ८५ज्ञ् थी, वहीं २०१८ में यह आंकड़ा ९४ प्रतिशत पर पहुंच गया। इसे देखते हुए सीआईएसएफ की ओर से यात्रियों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। सीआईएसएफ के मुताबिक, ज्यादातर महिला चोर सेंट्रल दिल्ली से मेट्रो में चढ़ती हैं। सबका चोरी करने का तरीका लगभग समान है। अधिकारियों ने कहा कि मेट्रो में चोरी की वारदातों में भले ही कमी आई हो, लेकिन यात्रियों को ऐसी महिलाओं या महिलाओं के कपड़े पहने हुए पुरुषों से सावधान रहना चाहिए जिनका व्यवहार उन्हें सामान्य न लगे।
अधिकारियों का कहना है कि पुरुष चोर अक्सर महिलाओं के कपड़े पहनकर महिला कोच में घुस जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पुरुष यात्रियों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा महंगी चीजें अपने साथ ले जाती हैं। चोर सलवार-सूट पहनते हैं और सिर को पल्लू से ढक लेते हैं। उनके हाथ में बच्चा रहता है, ऐसे में वह पुरुष हैं इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। महिला चोर भी सूट पहन, सिर को ढकते हुए और बच्चा लिए नजर आती हैं, ताकि उन पर किसी को शक न हो। भीड़ का फायदा उठाते हुए वह सावधानी से पर्स खोलती हैं और कीमती सामान पर हाथ साफ कर लेती हैं। काम होते ही अगले मेट्रो स्टेशन पर वह उतर जाती हैं। इस दौरान वह ध्यान रखती हैं कि जिस स्टेशन पर वह उतर रही हैं वहां भीड़ हो, जिससे कोई उन्हें पकड़ न सके। कुछ चोरनियां व चोर गैंग बनाकर काम करते हैं। वह मेट्रो कोच में या फिर प्लेटफॉर्म पर फैले रहते हैं और एक-दूसरे को चोरी का सामान पास करते हैं ताकि पकड़े जाने की स्थिति में उनके पास से सामान न मिले और वह छूट जाएं। सीआईएसएफ अनुसार, साल २०१८ में हर महीने मेट्रो में करीब ४० महिला चोरों को पकड़ा गया। पिछले साल सिर्फ अप्रैल ही ऐसा महीना रहा जब महिला चोर से जुड़ा एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है।
झा/देवन्द्र ११/जनवरी/२०१९

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