चुनाव आयोग दे रहा आदेश, व्यवस्था बनाने पर अफसरों का ध्यान नही

सुपरमेन बनी पुलिस फिर भी उसकी बढ़ी परेशानियाँ, चुनाव के दौरान फैल सकती है अव्यवस्था

हमारा सुझाव सरकारी डिस्पेंसरियों में एमएलसी करने की व्यवस्था की जाए

हर क्षेत्र में बढ़ती वारदातें, चार घंटे में एक एमएलसी, सभी एमवाय के भरोसे

इंदौर (राजेन्द्र के.गुप्ता 98270-70242) एक तरफ चुनाव आयोग अपराधियों के खिलाफ कार्यवाहियों करने का आदेश जारी कर रहा रहे है, दूसरी तरफ अपराध बढ़ते जा रहे है। व्यवस्थाएँ कम होती जा रही है, जिन्हें बनाने या बढ़ाने पर कोई ध्यान नही दे रहा है ! जबकि अलग से व्यवस्थाएँ और सुविधाएँ जुटाए बिना बन सकती है व्यवस्थाएँ ।

इंदौर में दुर्घटनाएँ, झगड़े, चाकुबाजी की घटनाओं सहित कई अपराध रोज हो रहे है। इन घटनाओं के होने पर पुलिस एमएलसी के लिए एमवाय और जिला अस्पताल ले जाती है । नए निर्माण के लिए जिला अस्पताल को तोड़ दिया गया है, इसलिए फिलहाल एमएलसी की व्यवस्था सिर्फ एमवाय में ही है। जिला अस्पताल के बंद होने से, यहा की व्यवस्था मल्हारगंज स्थित सरकारी डिस्पेंसरी में की जा सकती है । इंदौर के एक कोने से दूसरे कोने में स्थित पुलिस थानों से स्टाफ को एमएलसी के लिए एमवाय ही आना पड़ रहा है । दूरी के साथ वक्त भी अधिक लग रहा है । एक पुलिस अधिकारी ने नाम नही छापने की बात कहते हुए बताया एमवाय में पर्ची बनवाने से लेकर एक एमएलसी करवाने में लगभग चार घंटे का समय लग जाता है। थानों पर स्टाफ की कमी, अपराधों की जाँच, लिखापढ़ी और अपराधों की रोकथाम करने में लगने के साथ पुलिस कर्मचारियों को वीआईपी ड्यूटी और आयोजनों सहित अन्य व्यवस्था में लगना पढ़ता है । इन सब कारणों से पुलिस कर्मचारियों की परेशनियाँ काफी बढ़ गई है । पुलिस सुपरमेन की तरह काम कर रही है । इन सब व्यवस्थाओं को संभालने के बीच चुनाव आयोग ने इंदौर सहित प्रदेश के सभी एसपी/डीआईजी को आदेश के साथ थानों की सूची भेज कर अवैध हथियार और अवैध शराब के मामलों में ठोस कार्यवाही नही करने पर, कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। जिसकी रिपोर्ट भी तलब की है । हमारा सुझाव है कि एमएलसी करवाने की व्यवथा इंदौर की चारों सीमा में स्थित सरकारी डिस्पेंसरियों में कर दी जाए तो पुलिस के साथ प्रभावित जनता को भी बड़ी राहत मिल जाएगी, इसके लिए अलग से कोई साधन भी नही जुटाने पड़ेंगे । पुलिस का समय भी बचेगा जिसका उपयोग अन्य व्यवस्थाओं में किया जा सकता है । फिलहाल तो पुलिस की परेशानियाँ बढ़ी हुई है। ऐसी ही स्थिति रही तो चुनाव के दौरान भारी अव्यवस्था फैल सकती है और व्यवस्थाएँ सम्भालने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है । अचानक कोई घटनाएँ होने पर प्राथमिक मेडिकल रिपोर्ट काफी समय लग सकता है ।

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