स्वच्छता सर्वेक्षण टीम आरटीओ कार्यालय पहुँची तो सबसे गंदा शहर घौषित हो जाएगा इंदौर 

बिना पानी के, गंदगी में पीने के पानी की और बिना कुर्सी के महिलाओं को बैठने की व्यवस्था !
मोटी कमाई के लिए कमी निकाली जाती है
सरकार को मोटा राजस्व देने वाले कार्यालय में अव्यवस्था का साम्राज्य
 जनता के दस्तावेज रद्दी के ठेर में, ट्रायल के नाम पर छलावा
इंदौर । (राजेन्द्र के.गुप्ता 98270-70242) स्वच्छता अभियान की धज्जियाँ उड़ाते आरटीओ कार्यालय में, प्रशासन के स्वच्छता अभियान को ठेंगे पर मारा जा रहा है । अगर स्वच्छता सर्वेक्षण टीम आरटीओ कार्यालय पहुँच गई तो इंदौर देश का सबसे गंदा शहर घौषित हो जाएगा ।
पीएम, सीएम को शिकायत –
सरकार को भारी राजस्व देने वाले आरटीओ कार्यालय में अव्यवस्थाओं का साम्राज्य पसरा हुआ है । इस मामले में व्हीसल ब्लोअर अमर रघुवंशी, आरटीआई एक्टिविस्ट इरफान पटेल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित वरिष्ठ अधिकारी को मय साक्ष्य, फोटो, वीडियो और जनता के बयानो सहित शिकायत कर रहे है ।
आरटीओ को ना स्वच्छता से लेना देना,ना जनता की परेशानी से  –
दिनांक 10/01/2019 को जब हमने नए बने आरटीओ परिसर का दौरा किया तो लगा आरटीओ जितेन्द्र रघुवंशी को  प्रधानमंत्री मोदी जी, स्थानीय प्रशासन या महापौर के स्वच्छता अभियान से कोई लेना देना नही । ऐसा भी लगा क्या आरटीओ रघुवंशी अपनी आँखो पर घोड़े की तरह हरी (नोट की नही) पट्टी बाँधने के लिए बिना उधर,उधर देखे सीधे अपने केबिन में जाते है और गाड़ी भर कर निकल जाते है ? वर्ना यह कैसे संभव है कि कार्यालय के जिस रास्ते से वो गुजरते हो, कई घंटे वहा गुजारते है, फिर उन्हें अपने चारों तरफ फैला गंदगी का साम्राज्य क्यों नही दिखता ? अगर दिखता है तो उन्हें देश और शहर में चल रहे स्वच्छता अभियान से कोई लेना देना नही है, ना ही शुल्क के रूप में सरकार को राजस्व देने आने वाली जनता की परेशानियों से उन्हें कोई लेना देना है । मुख्य भवन से लेकर पूरे परिसर का बुरा हाल बना रखा है, ट्रायल भवन से मूत्रालय से गंदगी रास्ते पर बह रही है…..
बिना पानी के गंदगी में पीने के पानी की व्यवस्था –
आरटीओ के मुख्य कार्यालय में पट्टिका लगी है “ पीने का पानी “ पर नल में पानी नही है ,गंदगी इतनी की महिलाएँ उस तरफ देख कर नाक-मुँह सिकोड़ लेती है । आरटीओ रघुवंशी जिस रास्ते  से अपने केबिन तक जाते है, उन चढ़ाव के पास ही पीने के पानी की व्यवस्था के नाम पर जनता से गंदा मजाक किया जा रहा है । पीने के पानी के नलों के नीचे गुटके की पीक और उल्लटियों से इतना गंदा कर रखा है कोई उधर देख ले तो पानी पीने का सोचने से ही उल्लटियाँ होने लगे । पीने के पानी की जिस जगह व्यवस्था की है वहा टूटी कुर्सियों और गंदा वेस्टेज पटक कर बची-कुची कसर पूरी कर दी ।
लड़कियाँ,महिलाएँ लाईन में वहा ड्रेनेज का पानी भरा –
सरकार ने जिस उद्देश्य से इतनी दूर और इतना बड़ा आरटीओ कार्यालय बनाया है उस उद्देश्य की पूरी तरह से धज्जियाँ उड़ाई जा रही है । 01 से 15 नंबर खिड़की के पास बने कमरे में भी टूटी कुर्सियाँ पड़ी है और इस कमरे में गंदी बालटियाँ पड़ी है वही ड्रेनेज का पानी भी भरा हुआ है ।
कुर्सी के बिना महिलाओं के बैठने की व्यवस्था –
लर्निग लायसेंस परीक्षा कक्ष के बाहर पट्टिका लगी है जिस पर लिखा है “ महिलाओं के लिए सीट “  पर सीट (कुर्सियाँ) है ही नही। ऐसा लगता है जैसे महिलाओं के साथ सार्वजनिक रूप से मजाक किया जा रहा है ।
फर्जीवाड़े और विवादों का अड्डा बन गया आरटीओ –
इंदौर आरटीओ कार्यालय विवादों का अड्डा बन गया है ,हर वाहन चालक को इस आफिस के चक्कर लगाने पड़ते है । सड़कों पर वाहनों के बढ़ते रेलम-पेल से समझा जा सकता है आरटीओ कार्यालय में कितना राजस्व आता होगा निश्चित ही उसी हिसाब से काम करवाने के लिए हिस्सा भी बटता है जो जग जाहिर है । काली कमाई का गड़ आरटीओ कार्यालय में आए दिनों विवाद भी इसीलिए होते है क्योंकि यहा काम करने वाले दलाल कैसा भी काम करवा देने का दावा अफसरों से सेटिंग के चलते ही करते होंगे इसमें शक करने की गुंजाइश कम ही दिख रही है । क्योंकि जिस पर आरटीओ कार्यालय के किसी ना किसी अफसर का वृहद है वो उसके ग्राहक के आफिस पहुचने के पहले ही फाईल निकाल लेता है वर्ना ईमानदारी से काम करवा लेने का दावा करने वाले का दम निकल जाए पर उसकी फाईल नही निकल पाती है । खैर व्यवस्था में सुधार का दावा करने वाले कई आरटीओ आए और अपना खजाना भर कर चले गए । लगभग हर किसी आरटीओ अफसर के कार्यकाल में कोई ना कोई फर्जीवाड़ा उजागर हुआ ही है । कार्यवाही के नाम पर छोटे कर्मचारी पर खबर बनवाने जैसी कार्यवाही कर उस फर्जीवाड़े को दफन कर दिया जाता है । एफआईआर भी हुई पर ना आटोडील वालों को सजा हुई ना ,बाहर की गाड़ियों के फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करने करवाने वाले एजेंटों का कुछ बिगड़ा , इस आरटीओ कार्यालय के आगे एक बड़े स्वर्गीय राष्ट्रीय संत भी गच्चा खा गए , आरटीओ अफसरों ने पुराने वर्ष के दस्तावेजों से बाद के वर्ष में बने वाहन को दूसरे के नाम कर दिया ,सब कुछ सामने आने के बाद भी सिर्फ बयान लिए जा रहे है ,जैसे दस्तावेजों जो बोल रहे है उनकी कोई अहमियत ही नही ! आरटीआई एक्टिविस्ट वल्लभ चौहान और भुवन तोषनीवाल ने भी आरटीओ कार्यालय की स्थिति पर दुःख व्यक्त किया है ।वही बड़े बाबू आर.डी.महावर को ग्वालियर से वापस इंदौर आए कई दिन हो गए, इन्हें ना काम दिया गया, ना बैठने की व्यवस्था दी, ये कार्यालय आ कर इधर से उधर भटकते रहते है । आरटीओ कार्यालय में और मार्ग पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नही है । आरटीओ कार्यालय पहुचने के लिए कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रोड़ से पहुँचना होता है ।
ट्रायल के नाम पर खाना पूर्ति –
टू-व्हिलर के या फोर व्हिलर के लायसेंस बनवाने आए आवेदक से जिस ट्रेक पर ट्रायल लिए जा रहे थे वहा वाहनों की कतार लगी थी । टू-व्हिलर का ट्रायल ले रहे आरटीओ कर्मचारी आँखो पर काला चश्मा चढ़ाए ऐसे खड़े थे जैसे वो कोई सर्कस का तमाशा दिखाने वाले हो ! यहा ट्रेनिग पर आए पुलिस कर्मचारियों के थोक में ट्रायल लिए जा रहे थे । ट्रेक से ज़्यादा ट्रायल लेने वाले आरटीओ कर्मचारियों का ध्यान  साईड के लॉन में खड़े लोगों पर था !
रद्दी के ठेर में जनता के दस्तावेज –
प्रतीक्षा कक्ष में जनता के दस्तावेज रद्दी के ठेर की तरह खुले आम पटक दिए गए है । जहाँ कोई भी बे-रोक-टोक आता जाता है । ऐसे में जनता के द्वारा सुरक्षा के विश्वास से जमा करवाए उसके दस्तावेज किसी गलत हाथ में पहुँच ना जाए इसकी कोई ग्यारंटी नही है ।
मोटी कमाई के लिए कमी निकाली जाती है –
आरटीओ कार्यालय इतनी दूर और अंदर बना है, जहाँ पहुचने और काम करवाने के लिए दिन भर का समय निकालना पड़ता है । लायसेंस बनवाने,वाहन रजिस्ट्रेश व अन्य कार्यों के लिए आने वाली लड़कियों,महिलाओं और बुज़ुर्गों को आरटीओ कार्यालय ढूँढते हुए पहुचने  में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अव्यवस्थाएँ, गंदगी परेशानिया और मुसीबत बढा देती है । ऐसी स्थिति में कुछ एजेंट या आरटीओ कार्यालय से छोटी-मोटी कमी निकाल देने पर काम करवाने आया व्यक्ति ज़्यादा राशि देने को मजबूर हो जाता है ।

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