मध्यप्रदेश में हुआ करोड़ों का घोटाला

दीपक राय, भोपाल (ईएमएस)। गुरुवार को भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट विधानभा में पेश की गई। यह रिपोर्ट 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वर्ष के लिए जारी की गई। कैग के ऑडिट में आबकारी, बिजली, जल संसाधन विभाग, खनन विभाग के घोटाले उजागर हुए हैं। असफरों ने अनुचित तरीके से घपला कर सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपयों की हानि पहुंचाई। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के दौरान प्रदेश में करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है। वाणिज्यिक कर, उत्पाद शुल्क, वाहन कर, स्टॉम्प पंजीकरण शुल्क, खनन, जल कर में ये घोटाला किया गया। इन घोटालों के कारण सरकारी खजाने को करीब 6270.37 करोड़ का नुकसान हुआ। रिपोर्ट के अनुसार शिवराज सरकार के दौरान प्रदेश की पेंच परियोजना में करीब 376 करोड़ की अनियमितता की गई। वहीं, सार्वजनिक उपक्रमों से 1224 करोड़ का नुक़सान हुआ। आदिवासियों के हित के लिए चलाए जा रहे विद्यालय, छात्रावास के संचालन में 147.44 करोड़ की अनियमितता उजागर हुई। अफसरों की लापरवाही के कारण जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 9557.16 करोड़ की कुल 242 योजनाओं में से 24 परियोजना की 4800.14 करोड़ लागत बढ़ गई।

आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को लाभ दिया
शराब निर्माताओं ने सरकार को 100 करोड़ का चूना लगा दिया। असममित परिवहन के कारण वर्ष 2012-17 के दौरान यह घपला किया गया। 22 नियम ठेकों का विरुद्ध निष्पादन किया गया। 8982 मामलों में शासन को लगभग 100 करोड़ रुपयों का आबकारी शुल्क का नुकसान हुआ।

खनन में कलेक्टर भी घिरे
अफसरों ने व्यापारिक खदानों से अनुबंध राशि नहीं वूसली जिसके कारण वसूली बहुत कम रही। 18 जिलों में 11 ठेकेदारों और 58 पट्टेदारों से कम रायल्टी वसूल कर 62.50 करोड़ का नुकसानी पहुंचाया गया। जिला कलेक्टरों और खनन अफसरों की लापरवाही के कारण 20 अनुज्ञापत्र धारकों से 8.11 करोड़ कम रॉयल्टी वसूली 42 अनुज्ञापत्र धारकों से 8.12 करोड़ राशि नहीं वसूल पाए। केग ने अपनी रिपोर्ट में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

जल संसाधन विभाग ने अयोग्य ठेकेदारों को दिया काम
धसान केन कछार, सागर परियोजना में अफसरों ने गलत ठेकेदारों का चयन किया। बाद में ठेकेदार को बदलने के कारण 11.08 करोड़ का नुकसान शासन को हुआ। इसी तरह मुख्य अभियंता की लापरवाही के कारण भी शासन को 6.49 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने पड़े। तवा और बारना परियोजना में सीमेंट कांक्रीट लाइनिंग में भी घपला किया गया। इस कारण सरकार को 7.05 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रीवा की क्योटी नहर संभाग के कार्यपालन यंत्री ने ठेकेदार को मनमाना भुगतान किया। इस कारण ठेकेदार को 153.25 करोड़ का अनियमित भुगतान हुआ। शासन को अरबों रुपयों का नुकसान हुआ।

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