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स्पाइसजेट के पाक में एफ-16 से घेरे जाने के मामले में बड़ी चूक उजागर

-डीजीसीए ने कमर्शियल एयरलाइनर की जगह दे दिया था मिलिट्री कोड
नई दिल्ली । निजी क्षेत्र की हवाईसेवा स्पाइसजेट के एक विमान को पाकिस्तान में एफ-16 फाइटर जेट्स से घेरे जाने के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के ही एक अधिकारी की लापरवाही सामने आई है। पता चला है कि उस अधिकारी ने इस यात्री विमान को कमर्शियल एयरलाइनर के स्थान पर मिलिट्री का ‘ट्रांसपोंडर कोड’ दे दिया था। स्पाइसजेट का वह विमान पिछले महीने दिल्ली से उड़ान भरकर काबुल जा रहा था जब पाकिस्तान के आसमान में बेहद भयावह स्थिति का सामना करना पड़ा। दरअसल, मिलिट्री ट्रांसपोंडर कोड इस मामले में कमर्शियल कोड से अलग होता कि मिलट्री कोड वाले विमान उड़ान के किसी भी रास्ते पर रहे तो निश्चित तौर पर रेडार की पकड़ में आ जाए। एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ‘डीजीसीए का एक अधिकारी इस लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।’ सूत्रों का कहना है कि स्पाइसजेट एयरक्राफ्ट को गलती से एन 32 कोड दिया गया था जिसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना करती है। यह गलती उस वक्त हुई जब जेट एयरवेज का संचालन बंद होने के बाद स्पाइसजेट अपने वायुयानों का बेड़ा तेजी से बढ़ा रहा था।
डीजीसीए अधिकारी की यह चूक इतनी गंभीर थी कि पाकिस्तानी एफ- 16 ने बिना नुकसान पहुंचाए स्पाइसजेट एयरक्राफ्ट को अपनी सीमा से बाहर किया तो भारतीय अधिकारियों ने व्यक्तिगत तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों को धन्यवाद कहा। दरअसल, पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना द्वारा फरवरी महीने के आखिर में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। उसने 16 जुलाई को ही दोबारा अपना एयरस्पेस खोला था और महीने बाद ही यह घटना हो गई। इस नजरिए से भी बेहद गंभीर इस वाकये को पाकिस्तानी अथॉरिटीज ने बहुत ज्यादा तूल नहीं दिया। भारतीय अथॉरिटीज ने इसे बेहद संवेदनशीलता से सुलझा लेने के लिए उसका शुक्रिया कहा। दरअसल, लाहौर की एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) स्पाइसजेट को मिले मिलिट्री ट्रांसपोडर कोड से इस उलझन में पड़ गया कि यात्री विमान जैसा दिख रहा एयरक्राफ्ट उसे मिलिट्री कोड कैसे दे रहा है। घटना की गंभीरता के कारण प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी इसकी समीक्षा की और डीजीसीए अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। वहीं, डीजीसीए ने एयरक्राफ्ट्स को ट्रांसपोर्डर कोर्ड के अलॉटमेंट सिस्टम कंप्यूटराइज्ड कर दिया ताकि इस तरह की मानवीय चूक दोबारा नहीं हो।
विपिन// 19 अक्टूबर 2019

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