ताज़ा खबर

वरिष्ठ पत्रकार जहीर अंसारी का निधन

नहीं रहे हरदिल अजीज जहीर भाई
जबलपुर (ईएमएस)। रात १० बजे अचानक खबर मिलती है कि हरदिल अजीज सुख दुख के साथी जहीर भाई नहीं रहे, कम से कम मुझे तो इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि शाम पौने सात बजे उन्होंने मेरे साथ एक कॉफी का प्याला पिया था। आम तौर पर मुझसे बाद में कार्यालय से जाने वाले जहीर भाई ने अचानक मुझसे कहा कि यार सुनील मुझे काम है मैं निकलता हूं तुम रुकना। मुझे क्या मालूम था कि जहीर सचमुच में इस दुनिया से निकल जाएंगे। जहाँ तक उनकी मिलनसारिता का सवाल है तो मैं समझता हूं कि मेरे साथ ही उनसे जुड़े तमाम साथी उनकी मौहब्बत और मेहमान नवाजी के कायल थे। मजाल है कि कोई दफ्तर में आए और बिना चाय-कॉफी के चला जाए। उनके अजीज साथियों में वरिष्ठ पत्रकार चैतन्य भट्ट, काशीनाथ शर्मा, रवींद्र दुबे, संजीव चौधरी, विवेक गोस्वामी, पंकज शाह, विप्लव अग्रवाल, राजेश गोयल, प्रभात साहू, मोहम्मद कदीर सोनी, प्रदीप गोंटिया प्रतिदिन कि बैठक वालों में शुमार थे। या यूं कहें कि जिस दिन जहीर भाई से मुलाकात न हो ज़हन में सूना-सूना सा लगता था। जहीर भाई की मेहमान नवाजी की वजह से ईएमएस के दफ्तर की रौनक ही कुछ अलग थी। जबलपुर एक्सप्रेस और ईएमएस के प्रबंध निर्देशक सनत जैन के वफादार सिपहसालारों में से एक जहीर भाई ने अचानक इस दुनिया को अलविदा कहकर झकझोर दिया। अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वाकई जहीर भाई हम सब लोगों को छोड़ कर चले गए। एक्सप्रेस ग्रुप में स्थापना काल से जुड़े जहीर भाई के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने हरफनमौला की तरह इस संस्थान में अपनी सक्रियता और क्षमताओं का भरपूर योगदान दिया। जहीर भाई के निधन से सनत जैन और मुझे व्यक्तिगत क्षति हुई। मैंने अपने एक ऐसे बड़े भाई को खो दिया जो हर दम मेरी फिक्र करता था, मेरी बेटी की शादी का मसला हो या मेरी गंभीर अस्वस्थता का दौर उन्होंने सगे भाई की तरह फिक्र की, मेरे परिवार के सदस्यों से तालमेल बैठाया और लगातार मॉनिटरिंग करते रहे। इसी तरह संस्थान के प्रति भी वे वफादार और फिक्रमंद रहे। उनके निधन का समाचार सुनते ही सभी स्तब्ध रह गए। मेरे पास लगातार उनके शुभचिंतकों के फोन आने लगे और सभी एक ही बात कहते रहे कि इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है। उनके गोहलपुर, बड़ा कुआं स्थित निवास पर शोक संवेदनाएं व्यक्त करने वालों को तांता लग गया। मरहूम जहीर भाई को आज १७ अक्टूबर को दोपहर दो बजे मण्डी मदार टेकरी में सुपुर्दे खाक किया जाएगा। अल्ला ताला उन्हें जन्नत अता फरमाए… आमीन।
सरोकार वाली पत्रकारिता से था गहरा राब्ता
जय हिन्द के साथ सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट साझा करने वाले जहीर अंसारी की कलम में एक एसी सहजता, सरलता के साथ बात कहने की कला थी कि प्रथम पंक्ति से जुड़ा पाठक अंतिम पंक्ति तक पहुंचे बिना नहीं रह पाता था। वर्ष १९८९ से जबलपुर एक्सप्रेस, ईएमएस से जुड़े जहीर अंसारी की कलम में वो ताकत थी कि जटिल से जटिल मुद्दों को बेहद शालीनता और सहजता के साथ लिख दिया करते थे। पत्रकार जगत के साथ सामाजिक, राजनीतिक दलों के लोग भी उनकी लेखनी के कायल थे।
यादगार बन गई अंतिम तस्वीर
शुक्रवार को ही वे शहर के वरिष्ठ पत्रकारों के साथ शहर प्रवास पर आए डीजीपी से सौजन्य भेंट करने गए थे। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार काशीनाथ, रवींद्र दुबे, पंकज शाह वे अन्य गणमान्य पत्रकार उपस्थित थे। पंकज शाह ने अपनी इस फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए जिक्र किया कि फोटो खींचने के लिए डीजीपी साहब ने स्वयं फोटोग्राफर को इशारा करते हुए कहा कि यह फोटो यादगार बनेगी। उन्हें क्या पता था कि फोटो सचमुच यादगार बन जाएगी। डीजीपी से भेंट के बाद जहीर अंसारी अपने एक परिजन के विवाह समारोह की तैयारियों का जायजा लेने गए और इसके बाद ईएमएस के सिविक सेंटर स्थित कार्यालय भी पहुंचे, कॉफी पी और इसके बाद थोड़ा स्वास्थ्य ठीक महसूस न करने की वजह से घर रवाना हुए।
स्वास्थ्य के प्रति थे संवेदनशील
वरिष्ठ पत्रकार और मप्र राज्य विद्युत मंडल के पंकज स्वामी ने बताया कि जहीर भाई हमेशा से स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील थे। खानपान का विशेष ध्यान रखते थे। योग व वॉकिंग करते थे। यह खबर स्तब्ध करने वाली है। आर्ट ऑफ लिविंग के टीचर और स्टेट मीडिया प्रभारी ऋतुराज असाटी ने कहा कि वे ऐसी परिस्थितियों में कई बार लोगों को सांत्वना देते थे लेकिन जहीर भाई की मृत्यु से वे इतने आहत हैं कि उनके आंसू नहीं थम रहे हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, सांसद राकेश सिंह एवं जनसंपर्क आयुक्त सुदाम खाड़े ने ट्विट कर उनके निधन पर शोक व्यक्त किया हैं।
17अक्टूबर/ईएमएस/डेविड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *