कच्छ में 24 बार लगे भूकंप के हल्के झटके बढ़ी चिंता, एक्सपर्ट बोले- तैयारी करें

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-इन झटकों से पता चला क्षेत्र में तीन फॉल्ट लाइनें हो चुकी हैं सक्रिय
नई दिल्ली । गुजरात के कच्छ में शुक्रवार सुबह आए 4.6 की तीव्रता से आए भूकंप ने कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसने 24 साल पहले की उस तबाही के जख्म ताजा कर दिए जिसमें हजारों लोग की जिंदगी बर्बाद हो गई थी। इस ताजा भूकंप के हल्के झटकों और जमीन के नीचे हलचल ने भी वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भूवैज्ञानिकों को इन झटकों के बाद क्षेत्र में तीन फॉल्ट लाइंस का पता चला है जो अब सक्रिय हो गए हैं। इनकी वजह से पहले से ही भूकंप के लिए संवेदनशील कच्छ को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य झटके के बाद 30 घंटे के अंदर 24 आफ्टरशॉक्स भूकंप के बाद हल्के झटके भी लगे। शुक्रवार को तड़के 4.30 बजे से शनिवार सुबह 9.45 बजे के बीच ये कंपन नॉर्थ वागड फॉल्ट से पैदा हुई। इसे इस क्षेत्र में सबसे सक्रिय माना जाता है। भूकंप के हालिया डेटा से पता चला है कि कथरोल हिल, गोरा डोंगर और नॉर्थ वागड़ फॉल्ट लाइनें एक साथ सक्रिय हो गईं हैं। इसकी वजह से भारत के सबसे प्रमुख भूकंप संभावित क्षेत्र कच्छ को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कच्छ पहले से ही 10 से ज्यादा फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिनमें कच्छ मेनलैंड फॉल्ट और साउथ वागड़ फॉल्ट शामिल हैं, जो 2001 के विनाशकारी भूकंप के दौरान टूट गए थे। हाल तक अधिकांश भूकंपीय गतिविधियां इन्हीं ज्ञात क्षेत्रों के आसपास केंद्रित थीं। हालांकि, 2025 में दर्ज किए गए हालिया झटकों से पता चलता है कि तनाव नए फॉल्ट सिस्टमों में स्थानांतरित होकर फैल रहा है। भुज स्थित कच्छ यूनिवर्सिटी में जियोसाइंसेज डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर गौरव चौहान ने बताया कि नागर पार्कर और अल्लाह बंड जैसी पारंपरिक रूप से सक्रिय फॉल्ट लाइनों ने सालों से भूकंप उत्पन्न किए हैं, लेकिन अब चिंता की बात यह है कि हालिया झटकों ने नॉर्थ वागड़ फॉल्ट पर गतिविधि की पुष्टि की है, जबकि पिछले कुछ महीनों में काठरोल हिल और गोरा डोंगर फॉल्ट लाइनों पर दर्ज भूकंप यह संकेत देते हैं कि 2025 की शुरुआत से ही तीनों फॉल्ट लाइनें फिलहाल सक्रिय हो चुकी हैं।
प्रोफेसर चौहान के मुताबिक 1 से 3 तीव्रता के आफ्टरशॉक्स ने एकत्रित ऊर्जा को निकलने में मदद की है जिससे तुरंत किसी बड़े भूकंप की आशंका कम होती है। उन्होंने कहा कि आफ्टरशॉक्स दबाव घटाते हैं, लेकिन कई फॉल्ट लाइंस का सक्रिय होना भी चेतावनी है। ये फॉल्ट बड़े भूकंप को उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं और इसलिए तैयारी बहुत अहम है। हालांकि शुक्रवार का भूकंप तीव्रता में मध्यम दर्जे का था, लेकिन इसके झटके पूरे कच्छ में महसूस किए गए। झटके इतने तेज थे कि लोग डरकर घर से बाहर निकल आए। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज झटकों का कारण भूकंप के केंद्र की कम गहराई थी।
भूकंप वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कच्छ में आने वाला कोई शक्तिशाली भूकंप केवल इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र की भू-आकृतिक संरचना को देखते हुए, तेज झटके पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों पर भी असर डाल सकते हैं, जिससे सतर्कता की जरुरत और भी बढ़ जाती है। उन्होंने अधिकारियों से हालिया भूकंपीय गतिविधि को एक चेतावनी के रूप में लेने को कहा और नियमित भूकंप मॉक ड्रिल, भवन निर्माण मानकों के सख्त पालन और स्कूल शिक्षा में आपदा तैयारी को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।