काव्य ग़ज़ल

सच्चाई “सच्चाई “

दुनिया का अंक-विवरण पढ़ लो जान लो लीला जो पैसों ने रचाई है संसार के कुल धन का दस प्रतिशत नब्बे प्रतिशत जनता के लिए और नब्बे प्रतिशत धन केवल दस प्रतिशत लोगों के पास ये ही सच्चाई है धनवान के पास साधन हैं कि दिन-रात पैसा चौगुना होता रहे गरीब के पास बस मेहनत […]

काव्य ग़ज़ल

मेरी ग़ज़लों को आवाज दे दो

सुनो अपना दिल मुझको उधार दे दो , तुम पर ग़ज़ल कहूँ मैं थोड़ा प्यार दे दो! संग-संग हंसे और संग-संग रोंए दोनों मुझे भी अपने सुघर नेह की धार दे दो! सिवा तुम्हारे ना किसी का जिक्र करूँ मैं, अपनी चाहतों का अब ऐसा खुमार दे दो! है मुश्किल काम मोहब्बत को निभा पाना […]

काव्य ग़ज़ल

प्रकाशनार्थ कविता

चरैवेति! चरैवेति !! “”””””””””””””””””” हम भूल गए हैं रिश्ते बुनना दिमाग़ ने भी  छोड़ दिया प्रश्न पैदा करना शब्द भी तो अर्थ खोते जा रहे हैं धीरे धीरे सब क्षरित होते जा रहे हैं अमर बेल -सा दुःख   हर दिन हरा होता जा रहा स्मृतियों की घाटियों में गूंजती है स्वर लहरियां सुबह की रोशनी […]

काव्य ग़ज़ल

*प्रेम करुण धारा*

प्रिय तुम मेरे लिए न रोना नयननीर से नयन मत धोना ।। आँसू हर्ष व्यथा वेदना मुझको दे दो मैं सह लूँगा दीप्त ज्योति आलोक तुम्हें दे गहन कालिमा में रह लूँगा। जीवन सरिता के सुरम्य तट तुमको अर्पित तुम्हें समर्पित मेरा क्या है इक यायावर हूँ मझधारे में बह लूँगा। घनीभूत निज पीर ह्रदय […]

काव्य ग़ज़ल

निभाया ही नही

………………. साथ   कोई  यहाँ आया    ही   नहीं , और     कहते     हो  निभाया ही  नहीं ? रौशनी   के  लिए दीपक  जलते रहे, दुःखी रहा मेरा  मन  पर बताया ही नहीं ! उदास  सा  है  दिल किसी की याद में ,  कोई भी  स्वप्न मुझे भाया ही नहीं ! भावनाओं  की  चाह  देखा    नही  कभी , लेकिन   […]

काव्य ग़ज़ल

सूख सी गई

तपकर सूख सी गई चेहरे पर असंख्य  झुर्रियों की‌ रेखाएं आंखों में गहन अंधेरा भयानक रातों में हादसों से दो- दो हाथ करती हुई विपदाओं को ईश्वर- प्रदत्त अपना उपहार मानते हुए   गार्हस्थ्य- जीवन में निराशा   पूर्णरूपेण मुंह चिढ़ाती हुई   बच्चों की फरमाइशें    को पूरी करती हुई  उसे     आज मैंने […]

काव्य ग़ज़ल

समझिए चुनाव आ गया

नलों में बहने लगे पानी सड़को की आए पुनः जवानी जब दोहराने लगे वही कहानी समझिए चुनाव आ गया आपके दुखों का होगा तुरंत समाधान प्रचार में बतलाते कई दिग्गज महान भाषण में बोलेंगे आप ही हो मेरे भगवान समझिए चुनाव आ गया चरणों में गिर कर मागेंगे माफी चरित्र पवित्र कर लेंगे पी कर […]

काव्य ग़ज़ल

कौन जाने

किसको किसका सहारा है जाने या तुम जानो या हम ही जाने जीने–जीने में फ़र्क होता है ये हक़ीकत  को कौन जाने। सारी हमदर्दियाँ दिखावे की यार लोगों का हौसला जाने इसलिए आज तक नहीं देखे ख्वाब होते हैं ख्वाब ही जाने आप इसां नहीं फ़रिश्ता हैं आप भूख प्यास क्या जाने जिंदगी रूप कब […]

काव्य ग़ज़ल

अपना शहर

अपना यह शहर क्यों वीरान लगता है  अब तो हर शख्स यहां परेशान है लगता है चेहरे खो गए हैं आधे पर्दे में,  देखकर वह मुझको हैरान लगता है l  बंद दरवाजे खुलते नहीं हैं आने पर , अपना घर भी हमें अब मकान लगता है  l दूरियां बढ़ गई हैं अपनों से बहुत,  हर […]

काव्य ग़ज़ल

क्या खूब चली

क्या खूब चली,ऐसी चली सबकी बोलती बंद कर चली ना अगल देखा ना बगल देखा सब की ऐसी की तैसी करती चली वो क्या चली!सब के होंश उड़ा के चली ना उसने रोका ना इसने रोका ना घरवालों ने टोका और ना किसी की हिम्मत पड़ी रास्तों पे ठनी, अपनों से अड़ी न जाने कितने […]