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सामयिक व्यंग्य:

 शब्दों की बाजीगिरी  यूं रहा तो शब्दकोश ही बदलकर रख देंगे ये.. हमारे एक जानकार हैं। नाम है वागेश्वर। नाम के अनुरूप ही उनका अनुपम व्यक्तित्व है। धीर-गम्भीर, हर बात को बोलने से पहले तोलना कोई उनसे सीखे। न कोई दिखावा न कोई ढोंग। सीधे-सपाट। मुंहफट कहे तो भी चल सकता है। मोहल्ले में सब […]

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7वीं बार भी प्रधानमंत्री जी के भाषण ने आम जनता को किया निराश !

मार्च 2020 से लेकर अब तक सात बार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी लोगो के सामने आ चुके है और प्रत्येक बार अपने भाषण से लोगो को बेहद आकर्षक एवं प्रभावशाली नसीहत देते रहे है | आज भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें साझा की मसलन, लॉक-डाउन ख़त्म हुआ है कोरोना नहीं, जब तक दवाई नहीं तब […]

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व्यंग्य

लूटन बिगहा लूटन बिगहा की कथा गांव के लूटन सिंह ने सुनाई थी।उन्होंने कहा था कि इस गांव के लोग लूटेरे थे।इस गांव को हमारे पुरखों ने बसाया था।हमारे आदि मानव परिवार लूटेरे थे।सैकड़ों की संख्या में थें।एक रात में गांव के गांव लूट लेते थें।यहाँ पर छोटा-मोटा जंगल था।लोग लूटकर लाते और इसी जंगल […]

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व्यंग्य

, पति, पत्नी और वो का चक्कर नवेन्दु उन्मेष पति, पत्नी और वो का चक्कर हमेशा बुरा होता है और अब उसमें सीसीटीवी कैमरा भी शामिल हो गया है। इसके बाद वीडियो वायरल होने से इज्जत पर पलीता लगता है सो अलग। यह बात मुझे कल पत्नी समझा रही थी। कह रही थी तुम जो […]

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(व्यंग्य)

झूठ और सच सत्य के उत्तर काल में जब झूठ, सच पर इस कदर हावी हो गया कि सच और झूठ का हर अन्तर समाप्त हो चुका है। और हर भक्त अपने ही बुने भँवर जाल में फ़ँस कर बिल्कुल कन्फ्यूज़्ड हो चुका है और उसे यह तक भी याद नहीं कि किस सच के […]

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व्यंग्य

सरकारी छुट्टियां प्रगतिकारक, पूजक,देवतुल्य..?      *दिनेश गंगराड़े , शासकीय कर्मी और असरकारी छुट्टियों का “दाल-बाफले” का सा साथ है।छुट्टियों से ही कर्मचारी ज़िंदा है।कर्मियों से ही छुट्टियों की जान व  शान तथा कैलेंडर की पूछ परख है।सही मायनों में कर्मी ही सरकारी, अंग्रेजी कैलेंडर का सर्वश्रेष्ठ पोषक है एवं ढेरों छुट्टियों से ही कर्मी का […]

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लाईन की महिमा

हमारे दैनिक जीवन में लाईन की  महिमा अपरम्पार है।वैज्ञानिकों ने तो एक बिंदु से दूसरे बिंदु को जो जोड़े उसे लाईन कह कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली लेकिन उन्हें क्या पता था कि आगे जाकर यह लाईन लोगों के लिए जी का जंजाल बन जाएगी। एक ईमानदार थानेदार ने अगर ईमानदारी से काम […]

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अब कुंआरों का ब्याह भी कराएंगे गुरुजन ! गांव में एक रांडे(कुंआरे)  का ब्याह नहीं हो पा रहा था। एक दिन सुबह-सुबह आत्महत्या की सोच रस्सी लेकर वह खेत की ओर निकल पड़ा। रास्ते में रिश्ते में भाभी लगने वाली महिला ने हंसी-ठिठोली के मूड में छेड़ दिया। बोलीं-देवर जी, रस्सी से फांसी खाने का […]

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व्यंग्य

  ‘‘इज्जत का आॅन लाईन पंचनामा’’ सरकारी बाबू रविवार को सण्डे कहता है। सण्डे से अंग्रेजी ज्ञान पर गर्व होता है। प्राइवेट में बाबू नहीं, असिसटेंट बन जाता है। सण्डे शब्द साहब के लिए है। बाबू- साहब की तरह सण्डे को सण्डे मनाना चाहता है। सुबह देर से उठे, अखबार और चाय टेबल पर हो। […]

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व्यंग्य

‘‘ बाढ़ में टीले पर बैठा आदमी’’ राष्ट्रीय आपदा है-बाढ़। पर्व के रूप में मनाते हैं लोग। हर साल जुलाई में आ जाती है। पहले तैयारी करते हैं, पर्व की तरह। राजस्थान में इस पर्व को कभी-कभार मनाया जाता है। बिहार और असम के साथ-साथ मुंबई में जोर-शोर से यह पर्व मनाया जाता है। बूढ़ी […]