पुस्तक समीक्षा
“बेड़ियाँ तोड़ने की सज़ा” : बराबरी के संघर्ष और सत्ता का सच कुछ किताबें अपने समय की बेचैनी को शब्द देती हैं। संतोष पटेल का कविता-संग्रह ‘बेड़ियों को तोड़ने की सज़ा’ ऐसी ही बेचैनी से उपजा है। इनकी कविताओं के केंद्र में जाति, श्रम, आर्थिक विषमता, राजनीतिक सत्ता, सांस्कृतिक वर्चस्व और साहित्यिक प्रतिष्ठा के वे […]
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