वाल्मीकि योद्धा वीर चौधरी मनुवा पहलवान : एक परिचय 

चौधरी मनुवा पहलवान का जन्म गुड़गांव जिले की प्रसिद्ध दमदमा झील के पास वर्तमान में उजड़ा हुआ मुग़ल काल में आबाद गांव शालीखेड़ा में मुगल काल औरंगजेबी काल में चौधरी बिल्ला पहलवान व हरदेई के घर में हुआ।  इनके पिता चौधरी बिल्ला पहलवान (वाल्मीकि चिंडालिया गौत्र ) उस जमाने में आस पास के अपनी बिरादरी […]

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बेड़ियों को तोड़ने की सज़ा : एक समीक्षा

डॉ. संतोष का काव्य-संग्रह ‘बेड़ियों को तोड़ने की सज़ा’ समकालीन हिन्दी काव्य-जगत में वर्ग-संघर्ष और सामाजिक न्याय-व्यवस्था के खिलाफ़ प्रतिरोध का एक सशक्त दस्तावेज़ है। इस संग्रह में समाज के हाशिए पर खड़े शोषित वर्ग की पीड़ा, शोषक के दबाव का दर्द और सत्ता की अमिट भूख के संघर्ष को अत्यंत बारीकी से उजागर किया […]

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 निर्मला तो निर्मल थी….

जब भी हिंदी साहित्य में नारी-जीवन की करुण गाथा का उल्लेख होता है, तो सबसे पहले प्रेमचंद के उपन्यास “निर्मला” की याद आती है। निर्मला केवल एक पात्र नहीं, बल्कि उस युग की लाखों स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करती है, जिनका जीवन समाज की कुरीतियों ने उनकी इच्छा के विरुद्ध मोड़ दिया। निर्मला का नाम ही […]

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छंदबद्धगीत -रक्षाबंधन

रक्षाबंधन है अति प्यारा, प्रेम भरा  त्योहार। नेह बाँटते जग में सारे, उल्लासित परिवार |। रक्षाबंधन पर्व मनाएँ, मिले ख़ुशी सौगात। प्रेमिल बंधन बाँधे मन जब, प्रेम करें बरसात।। रेशम का है धागा न्यारा, जीवन बुनता सार । रक्षाबंधन है अति प्यारा, प्रेम भरा  त्योहार।। पहले बहना तिलक लगाती, अक्षत रोली डाल। राखी बाँधे सदा […]

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दिमाग के लिए टॉनिक : ‘ पढ़ोगे तो हँसोगे ‘

पुस्तक : ‘ पढ़ोगे तो हँसोगे ‘ (हास्य)  लेखक : श्री गोविंद शर्मा (संगरिया)  प्रकाशक : साहित्यागर, धामाणी मार्किट की गली, चौड़ा रास्ता, जयपुर – 302003( राज.) संस्करण : 2025,      मूल्य : 200 रुपये  समीक्षक : राजकुमार जैन राजन, आकोला  ——————————————————————-           जीवन के लिए हास्य की आवश्यकता क्यों ? इस बारे में ख्यातनाम […]

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कैक्टस

      पापा- पापा, अगले शुक्रवार को सुबह सुबह हम सब कश्मीर घूमने के लिए चल रहे हैं,आप वहां के हिसाब से कपड़े रख लेना।मैने वहां सब व्यवस्था कर दी है,यहां से फ्लाइट से श्रीनगर वहां कार बुक कर दी है,होटल बुक हो गये है।       एक सांस में मुन्ना ने बड़े ही उत्साहित रूप में सब कुछ […]

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कहानी: कर्तव्य का हाथ

माता-पिता की आँखों का तारा, रमेश, बचपन में बहुत चंचल और नटखट था। गाँव की गलियों में उसकी हँसी और चहल-पहल से हर घर गूंज उठता था। लेकिन किसे पता था कि एक पल की लापरवाही उसकी पूरी ज़िंदगी बदल देगी। एक दिन दोस्तों के साथ गेंद से खेलते-खेलते रमेश अचानक ध्यान खो बैठा और […]

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परिवारों को जोड़ती है ‘रिश्तों की डोर’

पुस्तक: रिश्तों की डोर तथा अन्य कहानियां  समीक्षक: शिव मोहन यादव लेखिका: विद्या श्रीवास्तव प्रकाशन: राज पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली मूल्य: 300 रुपये कहानी का इतिहास सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक सतत संवाद रहा है, जिसकी शुरुआत माधव राव सप्रे की ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ जैसी कहानियों से होती है, जो नैतिक पक्षधरता […]

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कहानी – पिता पेड़ और यादें   

डॉ टी महादेव राव साठ साल के सुंदर लाल अपने पुरखों से मिले बड़े से खंभों वाले घर की चौखट पर खड़े हैं  और सामने सौ साल पुराने पीपल के पेड़ को देखकर आह भर रहे  हैं। वह घर, वह पेड़ सिर्फ़ ईंट और लकड़ी नहीं है… उनकी आधी जिंदगी हैं।  उनकी पत्नी लक्ष्मी ने […]

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पुस्तक समीक्षा:उपन्यास स्टेलमेट : एक स्त्री के बहाने हमारे समय के सवाल

किसी भी उपन्यास की असली शक्ति उसके कथानक में नहीं, बल्कि इस बात में होती है कि वह अपने पात्रों के साथ पाठक का रिश्ता कितना गहरा बना पाता है। हाल ही में प्रकाशित दीपक गिरकर का उपन्यास ‘स्टेलमेट’ इसी अर्थ में उल्लेखनीय है। यह किसी रहस्य, रोमांच या घटनाओं की तेज़ रफ्तार से पाठक […]

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