जेफ्री एप्स्टीन की 5000 करोड़ की संपत्ति का वारिस कौन? नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोपी की दौलत पर 44 दावेदार

अनिकेत सिंह  दुनिया के सबसे कुख्यात अपराधियों में गिने जाने वाले अमेरिकी कारोबारी जेफ्री एप्स्टीन की मौत को सात वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उसकी लगभग 5000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति को लेकर विवाद अब भी जारी है। नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण कराने और प्रभावशाली लोगों तक उन्हें पहुंचाने के आरोपों के […]

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मनुस्मृति क्या है 

अरविंद ‘कुमारसंभव’  इन वर्षों में मनुस्मृति की बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है और वो भी अच्छे अर्थों में नहीं। जनमानस सैंकड़ों वर्षों से मनुस्मृति को भूल चुका था लेकिन संयोगवश भारतीय समाज का एक वर्ग इस पुस्तक का विरोध करके इसे सतत चर्चा में बनाये हुए है और इसका सबसे बड़ा खरीदार भी बना […]

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सांस्कृतिक धरोहर और उसके संरक्षण के लिए जागरूक बने नई पीढ़ी……

पुस्तक चर्चा  बुधवार को डाक से संस्कृति वैभव की वार्षिक पत्रिका का चतुर्थ अंक प्राप्त हुआ। पत्रिका में चार खंडों पुरातत्व और इतिहास खंड, धर्म – संस्कृति खंड, सहकार सेवा खंड एवं पर्यटन खंड में विभक्त हैं जिनमें 28 शोध आलेख शामिल किए गए हैं। पुरातत्व, कला, इतिहास और संस्कृति पर आधारित शोध पत्रिका इन […]

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‘एलियन से दोस्ती’ रोचक विज्ञान कथा संग्रह 

पुस्तक: एलियन से दोस्ती समीक्षक: शिव मोहन यादव लेखक: डाॅ. उमेश चमोला प्रकाशक: समय साक्ष्य, देहरादून मूल्य: 125 रुपये विज्ञान कथाएं आज के समय की मांग है और इस पर बेहतर काम करने वालों में डाॅ. उमेश चमोला एक उदीयमान रचनाकार हैं। पुस्तक का शीर्षक पहली नजर में ही आकर्षित करने वाला है, जिज्ञासा उत्पन्न […]

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डायमंड बुक्स के चेयरमैन नरेन्द्र कुमार वर्मा का निधन, भारतीय प्रकाशन जगत ने खोया दूरदर्शी साहित्य-सेवी

नई दिल्ली । भारतीय प्रकाशन जगत के अग्रणी हस्ताक्षर, डायमंड बुक्स के चेयरमैन श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा का 10 जुलाई 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य, प्रकाशन उद्योग और पुस्तक प्रेमियों के बीच शोक की लहर है। उन्होंने अपने जीवन के सात दशकों से अधिक समय तक भारतीय पठन संस्कृति को समृद्ध […]

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…..नहीं डरता कोई ईश्वर से…

     सदियों से की गई हैं          औरतें निर्वस्त्र,        कभी सभाओं में        कभी देवालयों में, समाज तब भी  अपलक देखता था उसके नग्न उभरे  अंगों को वहशीपन टपकती  आँखों से, आज भी टुकुर- टुकुर        ही देखता है, समाज पहले भी नपुंसक  था, आज भी नपुंस्क है  अपनी स्त्रियों की आबरू  बचाने में,       सुनो,       नहीं डरता कोई भी  […]

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पुस्तक समीक्षा- 

 सकारात्मक सोच की कहानियां : ‘दादू का पिटारा’            भारत में आरंभिक बाल कथा साहित्य के रूप में पंचतंत्र, कथासरित्सागर, सिंहासन बत्तीसी, बैताल पच्चीसी, अलिफ़लैला आदि की कहानियां प्रचलित थी। इन्हें आज भी एक पाठक वर्ग बहुतायत से पढ़ता है। आधुनिक काल में बाल कथा साहित्य के इस पूरे परिदृश्य में काफी बदलाव आया है और […]

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सिनेमा का बदलता मिज़ाज: पॉपकॉर्न से स्क्रीन तक

क्या आपको याद है, जब हम अपनी पसंदीदा फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों के बाहर घंटों लंबी कतारों में खड़े रहते थे? टिकट की उस छोटी सी कागज की पर्ची की कीमत आज के किसी भी डिजिटल ‘सब्सक्रिप्शन’ से कहीं अधिक महसूस होती थी। सिनेमा हॉल तक जाना केवल एक फिल्म देखना नहीं था, बल्कि […]

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मैं तीसरा प्रश्न हूँ

मैं उस प्रश्नपत्र का तीसरा प्रश्न हूँ,  जिसे समाज ने पढ़े बिना ही छोड़ दिया। और मैं,  सारी उम्र उसी प्रश्न का उत्तर खोजता रहा। मैंने देखा है,  कैसे सभ्यताएँ चाँद पर झंडे गाड़ती हैं,  और धरती पर मेरे लिए एक  कुर्सी तक खाली नहीं छोड़तीं। मेरी हँसी को तमाशा समझा गया,  मेरी चाल को […]

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मन!!!!!आकाशगंगा 

हृदय के भीतर  न जाने कितने ब्रह्मांड बसते हैं। विचार कभी ग्रह बनकर  परिक्रमा करते हैं, कभी टूटते तारों-से  बिखर जाते हैं। कुछ स्मृतियाँ चाँद की  शीतलता बनकर ठहरती हैं, तो कुछ इच्छाएँ  सूर्य-सी दहकती रहती हैं। और मन इन्हीं अनगिनत  आकाशगंगाओं में भटकता है। और जो शब्दों में उतर आता है,  आपके पास चला […]

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