खंडहर हुआ घर
माटी का यह घर कहे, सुन लो मेरी बात, दीवारों में कैद हैं, अब गुजरी औकात॥ कभी जला चूल्हा यहाँ, गूँजी हँसी-मल्हार, अब सन्नाटा ओढ़कर, बैठा सूना द्वार॥ बरसों की बरसात ने, छीनी इसकी शान, टूटी छत से आज अब, झाँकता आसमान॥ पीढ़ी बदली, गाँव भी, बदले सब हालात, माटी का यह घर कहे, सुन […]
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