खंडहर हुआ घर

माटी का यह घर कहे, सुन लो मेरी बात, दीवारों में कैद हैं, अब गुजरी औकात॥ कभी जला चूल्हा यहाँ, गूँजी हँसी-मल्हार, अब सन्नाटा ओढ़कर, बैठा सूना द्वार॥ बरसों की बरसात ने, छीनी इसकी शान, टूटी छत से आज अब, झाँकता आसमान॥ पीढ़ी बदली, गाँव भी, बदले सब हालात, माटी का यह घर कहे, सुन […]

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औरतें जिन्दा रहेंगी 

    वो कहते है औरतें अलग हैं जिनकी बेवाई फटती है जिनके पांव जमीन नहीं छूते जो ऑफिस जाती है जो बच्चे पालती है जो बरसीम काट कर लाती है जो विदेश जाती है जो पति के साथ रहती है जो अकेले रहती है जो झुकती है जो तन जाती है और बहुत सी ये एक […]

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08 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

उठो जगत जननी नारी तुम… उठो जगत जननी नारी तुम, युग निर्माण तुम्हें है करना। भारत की आज़ाद नींव में, तुम्हें प्रगति पत्थर है भरना… तुम फूलों से सज्जित क्यारी, ममता मूर्ति समस्त जगत की। अपनी संस्कृति का हो गौरव, आहट हो स्वर्णिम आगत की। तुम्हें नया इतिहास देश का, अपने कर्मों से है रचना… […]

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