ग़ज़ल
चंदे की रकम का आप हिसाब दीजिए। पाँच साल तक कहाँ थे जवाब दीजिए।। पलायन से हुआ गाँव मेरा बरबाद, बरबादी पे लिख कर किताब दीजिए। आपके वादे के भरोसे हम जीते रहे, सब्र ख़ातिर हमको धन्यवाद दीजिए। वोट लेकर जो गए कहाँ खो गए आप, आए हैं तो चेहरे पर नक़ाब दीजिए। तबाह हुई […]
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