पांच दशकों के दौरान बस्तर के आदिवासी समुदाय ने भयंकर पीड़ा झेली: शाह

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नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो गया है। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के पांच दशकों के दौरान बस्तर के आदिवासी समुदायों द्वारा झेली गई पीड़ा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम से 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को लाभ मिला। केंद्रीय गृह मंत्री ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जिसमें दिव्यांगजनों (जिनमें नक्सली हिंसा से प्रभावित लोग भी शामिल थे) को सहायक उपकरण बांटे गए।
केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में आयोजित पहल से 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को फायदा हुआ, जिसमें सिर्फ बस्तर के 1,570 से ज्यादा लाभार्थी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इससे 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को लाभ मिला। सिर्फ बस्तर में ही 1,570 से ज्यादा लाभार्थी थे। यह संख्या बस्तर के दर्द को दिखाती है। पिछले 5 दशकों से फैले नक्सलवाद ने बस्तर के गरीब आदिवासियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह आंकड़ा पूरी दुनिया के सामने इस सच्चाई को रखता है।
छत्तीसगढ़ में दशकों से चली आ रही नक्सली हिंसा का आदिवासी समुदायों पर पड़े असर का जिक्र कर शाह ने कहा कि इस इलाके में दिव्यांगजनों की संख्या यह बताती है कि वहां के लोगों ने इस हिंसा के कारण कितनी पीड़ा झेली है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर पिछले 5 दशकों के नक्सलवाद का क्या असर पड़ा है, इसका अंदाजा दिव्यांग लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। मानवाधिकारों का इससे बड़ा उल्लंघन और क्या हो सकता है कि कोई आईईडी (विस्फोटक) लगाए और उससे किसी का हाथ या पैर उड़ जाए।
केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि यह पहल उन राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों का हिस्सा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करने के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि इस अभियान के तहत नक्सलवाद के कारण दिव्यांग हुए आदिवासी लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा रहे हैं।