GDP की छलांग और जनता की धीमी होती जिंदगी

GDP के आंकड़ों के पीछे आम आदमी का सच “सरकार GDP की ऊंची छलांग दिखा सकती है। बजट का विशाल आकार दिखा सकती है। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने का दावा कर सकती है।लेकिन अंततः देश का नागरिक एक ही सवाल पूछेगा,“देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत बढ़ रही है तो मेरी आमदनी, मेरी बचत और […]

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मिथ्या वचन, विष वमन और चरित्र हनन: ज़ुबान ही साम्राज्यों की कब्र खोदती है

By ओंकारेश्वर पांडेय नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026: तमिलनाडु के युवा मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने हाल ही में अपने समर्थकों और डिजिटल वॉरियर्स को एक स्पष्ट हिदायत दी—”सोशल मीडिया पर विचार रखते समय भाषा का संयम न खोएं।”  दुनिया भर में इस पहल का स्वागत हो रहा है। स्वागत इसलिए नहीं कि यह कोई […]

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ओमान तट पर अमेरिकी हमला और कूटनीतिक आत्मसमर्पण

: क्या भारत की रणनीतिक स्वायत्तता एक छलावा मात्र है? – आलोक बाजपेयी (लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं अर्थशास्त्र के शोधार्थी हैं) ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी केंद्रीय कमान  द्वारा तीन वाणिज्यिक जहाजों—MT Settebello, MT Mariveks, और MT Jalveer—पर किए गए भीषण हमलों ने वैश्विक राजनीति में भारत के कद और उसकी सुरक्षा […]

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