पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए यात्रा कार्यक्रम नहीं मांग सकता प्राधिकरण : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के संवैधानिक ढांचे में स्वतंत्रता राज्य का उपहार नहीं, बल्कि उसका पहला दायित्व है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट नवीनीकरण के चरण में पासपोर्ट प्राधिकरण किसी व्यक्ति से भविष्य की यात्रा योजनाओं या वीजा की अनुसूची की मांग नहीं कर सकता।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की पीठ ने कहा कि पासपोर्ट प्राधिकरण की भूमिका सीमित है। उसका दायित्व केवल यह जांचना है कि लंबित आपराधिक कार्यवाही के बावजूद संबंधित आपराधिक अदालत ने अपनी निगरानी में व्यक्ति को यात्रा की अनुमति देने का विकल्प खुला रखा है या नहीं। अदालत ने कहा कि नवीनीकरण के समय संभावित या अभी अस्तित्व में ही न होने वाली यात्राओं का विवरण मांगना तर्कसंगत नहीं है। पीठ ने कहा, कि हमारे संवैधानिक ढांचे में स्वतंत्रता राज्य का उपहार नहीं बल्कि उसका पहला दायित्व है। कानून के अधीन रहते हुए किसी नागरिक को आवागमन, यात्रा, आजीविका और अवसर प्राप्त करने की स्वतंत्रता भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रशासनिक औपचारिकताओं के नाम पर अनावश्यक रूप से सीमित नहीं किया जा सकता।
यह आदेश महेश कुमार अग्रवाल की याचिका पर दिया गया। अग्रवाल झारखंड के रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं और वर्तमान में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। जमानत की शर्तों के तहत उन्होंने अपना पासपोर्ट अदालत में जमा किया हुआ था, लेकिन उनका पासपोर्ट वर्ष 2023 में समाप्त हो गया था। अग्रवाल ने पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुमति मांगी थी, जिसे कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, कोलकाता को पासपोर्ट नवीनीकरण का निर्देश देने की मांग की थी।
शीर्ष अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुनाया और पासपोर्ट प्राधिकरण को उनका पासपोर्ट नवीनीकृत करने का निर्देश दिया। अदालत ने दोहराया कि नवीनीकरण के स्तर पर वीजा या भविष्य की यात्रा योजनाओं की मांग करना कानूनन उचित नहीं है।