पीड़ितों को डराने-धमकाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई; जाति प्रमाण पत्र के अभाव में नहीं रुकेंगे प्रकरण ::
इन्दौर । अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम-1989 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पीड़ितों को दी गई राहत राशि की समीक्षा की गई और न्याय प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं पर कड़ा रुख अपनाया गया।
बैठक के दौरान जिला लोक अभियोजन विभाग की जानकारी में यह बात सामने आई कि कई मामलों में पीड़ितों द्वारा अपराधियों के साथ राजीनामा किया जा रहा है। इस पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने गहरी अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि पीड़ितों को राजीनामा करने के लिए डराया-धमकाया जाता है या प्रलोभन दिया जाता है, तो इसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को दी जाए। ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य नरेन्द्रसिंह भिडे ने बताया कि 1 जनवरी 2025 से अब तक जिले में कुल 266 पीड़ितों को सहायता प्रदान की गई है। इसमें अनुसूचित जाति वर्ग के 150 पीड़ितों को 1 करोड़ 84 लाख 87 हजार 500 रुपये एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 116 पीड़ितों को 1 करोड़ 26 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
अजाक थाना (नगरीय एवं ग्रामीण) में जाति प्रमाण पत्र के अभाव में लंबित प्रकरणों पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि संबंधित थाना क्षेत्र के एसडीएम से संपर्क कर पीड़ितों के प्रमाण पत्र प्राथमिकता पर बनवाए जाएं। जनजातीय कार्य विभाग को निर्देशित किया गया कि कोई भी पात्र पीड़ित योजना के लाभ से वंचित न रहे।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन, पुलिस एवं लोक अभियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा समिति के अशासकीय सदस्य प्रिंसपाल टोंग्या, पप्पू बैरवा और रमाकांत गुप्ता सहित अन्य विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।

