नीतीश कुमार का जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय, 24 को हो सकती है घोषणा

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-निशांत कुमार बहुत जल्द सरकार और संगठन दोनों में अहम जिम्मेदारी संभालेंगे
पटना । जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा है कि नीतीश कुमार का पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय है और 24 मार्च को इसकी घोषणा की जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक रविवार तक नामांकन भरने की आखिरी तारीख है। 24 मार्च को नाम वापस लेने की डेडलाइन है। अगर कोई और नामांकन नहीं आया तो 24 मार्च को ही निर्विरोध चुनाव की घोषणा होगी। जानकारी के मुताबिक स्क्रूटनी 23 मार्च को होगी। अगर जरूरत पड़ी तो 27 मार्च को वोटिंग कराई जाएगी।
बता दें यह नीतीश कुमार का चौथा या पांचवां टर्म होगा। राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा सक्रिय रहेंगे। संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार पार्टी और सरकार दोनों को गाइड करेंगे। यहां यह भी बता दें कि बिहार में समृद्धि यात्रा जारी है, लेकिन अब फोकस राष्ट्रीय राजनीति पर शिफ्ट हो रहा है। वहीं। बीते आठ मार्च को जदयू में विधिवत रूप से शामिल हुए सीएम नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर संजय झा ने और भी बड़ा बयान दिया है। झा ने कहा कि निशांत कुमार बहुत जल्द सरकार और संगठन दोनों में अहम जिम्मेदारी संभालेंगे। युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पॉपुलैरिटी है। नई बिहार सरकार में वे कैबिनेट का हिस्सा बन सकते हैं।
जेडीयू नेता अब खुलकर कह रहे हैं कि निशांत पिता के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और पार्टी में उनका रोल जल्द तय होगा। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नया मुख्यमंत्री बन सकता है और निशांत को डिप्टी सीएम या मंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा तेज है। ऐसे में साफ है कि संजय झा का यह बयान बिहार की राजनीति में नया टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। नीतीश राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर केंद्र की राजनीति पर फोकस करेंगे, जबकि निशांत राज्य स्तर पर पार्टी को मजबूत करेंगे। जेडीयू कार्यकर्ता इस फैसले से खुश हैं और 24 मार्च का इंतजार अब खत्म होने वाला है।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं, तो वे एक साथ संगठन और सत्ता दोनों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेंगे। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बीच संजय झा के मुताबिक पिछले कुछ समय से निशांत सार्वजनिक रूप से सक्रिय हैं और पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी बढ़ी है। ऐसे में जेडीयू के अंदर इसे “नेतृत्व की अगली पीढ़ी” के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि यह बदलाव बिहार की राजनीति और एनडीए के अंदर की राजनीति पर क्या असर डालते हैं।