होर्मुज स्ट्रेट दोस्तों के लिए खुला है, लेकिन दुश्मनों के लिए बंद है

अंतरराष्ट्रीय

अरागची बोले- दुश्मन देशों के लिए एक बूंद तेल भी इस रास्ते से नहीं गुजरने देंगे
तेहरान । ईरान-अमेरिका की जंग पूरी दुनिया के लिए बड़ा तेल संकट लेकर आई। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब सबसे बड़ा झटका हॉर्मुज स्ट्रेट से आया है, जो दुनिया के तेल कारोबार की सबसे अहम लाइफलाइन है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट दोस्तों के लिए खुला है, लेकिन दुश्मनों के लिए बंद है। उन्होंने भारत का नाम लेते हुए कहा कि ऐसे देश जिन्हें हम दोस्त मानते हैं उनके लिए यह बंद नहीं है। उन्होंने इसमें रूस, चीन, पाकिस्तान का भी जिक्र किया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब्बास अरागची ने कहा कि हमारे दुश्मनों और उनके साथियों के जहाजों को गुजरने देने का कोई कारण नहीं है। वहीं उन्होंने दावा किया कि ईरान ने अपने दोस्त देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया है। दरअसल होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का करीब 20 फीसदी संभालता है, लेकिन हालात इतने बिगड़ गए हैं कि यहां से आवाजाही करीब ठप हो गई है। ईरान के जवाबी हमलों के चलते इस अहम समुद्री रास्ते पर संकट गहरा गया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उथल-पुथल है।
बता दें इससे पहले ईरान ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, इजराइल या उनके सहयोगियों के लिए ‘एक बूंद तेल भी’ इस रास्ते से नहीं गुजरने दिया जाएगा। इस बयान ने साफ कर दिया है कि ईरान अब सीधे आर्थिक दबाव की रणनीति अपना रहा है। वहीं भारत ने इस संकट के बीच एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। भारतीय नौसेना ने अपने मिशन ‘ऑपरेशन उर्जा सुरक्षा’ के तहत मोर्चा संभाल लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय नौसेना ने पांच से ज्यादा फ्रंटलाइन वॉरशिप तैनात कर दी है, ताकि भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस ऑपरेशन का मकसद भारत के लिए जरूरी तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान लेकर आने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इनमें एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल से भरे जहाज शामिल हैं, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम हैं।