तेहरान । ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण संघर्ष में पहली बार अपनी सबसे खतरनाक सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल कर युद्ध को एक नए और विनाशकारी मोड़ पर ला खड़ा किया है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग कर रहे हैं, वहीं तेहरान ने घुटने टेकने के बजाय अपने सबसे घातक हथियारों के मुंह खोल दिए हैं। ईरान के इस ताजा हमले में अरब देशों में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को व्यापक नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।
ईरान की इस मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल सेजिल-2 को रक्षा गलियारों में डांसिंग मिसाइल के नाम से जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अत्यधिक ऊंचाई पर जाकर अपनी दिशा बदलने में सक्षम है, जिससे इजरायल के आयरन डोम जैसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चकमा देना इसके लिए आसान हो जाता है। दो चरणों वाले ठोस ईंधन (सॉलिड-फ्यूल) से चलने वाली यह मिसाइल लगभग 2000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। ठोस ईंधन आधारित डिजाइन होने के कारण इसे बेहद कम समय में लॉन्च के लिए तैयार किया जा सकता है, जो इसे पुराने तरल ईंधन वाले सिस्टम की तुलना में रणनीतिक बढ़त देता है। मिसाइल के तकनीकी पक्ष को देखें तो लगभग 18 मीटर लंबी और 23,600 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल करीब 700 किलोग्राम का पेलोड ले जाने में सक्षम है। इसकी रफ्तार मैक 4 से मैक 5 (6000 किमी प्रति घंटा से अधिक) तक पहुंच सकती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो रेंज और मारक क्षमता के मामले में इसे कई मायनों में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से भी अधिक घातक माना जा रहा है। जहां अमेरिका टॉमहॉक जैसी मिसाइलों से ईरान पर हमले कर रहा है, वहीं ईरान के शाहेद ड्रोन और अब सेजिल मिसाइल ने सहयोगी सेनाओं की नाक में दम कर रखा है। इस महायुद्ध का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होने से एशियाई देशों में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। पूरी दुनिया इस टकराव के खत्म होने की उम्मीद लगाए बैठी है ताकि डगमगाती वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल सके। हालांकि, सेजिल जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल इस आग में घी डालने का काम कर रहा है, जिससे शांति की संभावनाएं फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं।

