10 मिली से अंधा और 30 मिली मेथनॉल के उपयोग से इंसान की होती है मौत

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-मेथनॉल युक्त शराब पीने से पूने में 17 मजदूरों की मौत
नई दिल्ली । कई डॉक्टरों और जानकारों का कहना है कि मेथनॉल की बेहद मामूली मात्रा भी इंसान को जीवनभर का दर्द दे सकती है। केवल 10 मिलीलीटर शुद्ध मेथनॉल का सेवन किसी भी व्यक्ति की आंखों की रोशनी को हमेशा के लिए छीनने यानी उसे पूरी तरह अंधा बनाने के लिए काफी है। वहीं, इसकी लगभग 30 मिलीलीटर मात्रा किसी भी वयस्क इंसान को सीधे मौत की नींद सुला सकती है। इसके लक्षण शरीर में पहुंचने के 6 से 24 घंटे बाद दिखाई देने शुरू होते हैं। शुरुआत में पीड़ित को तेज सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक उल्टी और पेट में असहनीय दर्द जैसी शिकायतें होती हैं। स्थिति बिगड़ने पर आंखों के सामने पूरी तरह धुंध छा जाती है, सांसें तेज हो जाती हैं, रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) तेजी से गिरता है और मरीज अंततः कोमा में चला जाता है। जो लोग इलाज के बाद बच भी जाते हैं, वे अक्सर स्थायी अंधापन, किडनी फेलियर और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) की गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
मेथनॉल की इसी जानलेवा और विनाशकारी प्रकृति का एक बेहद भयावह रूप हाल ही में महाराष्ट्र के पूना में देखने को मिला। पूना में अवैध रूप से बनाई गई सस्ती देसी शराब में मिलावट के तौर पर इस खतरनाक मेथनॉल रसायन का इस्तेमाल किया गया था। इस जहरीली शराब को पीने के कारण अब तक 17 स्थानीय मजदूरों और निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारियों की तड़प-तड़प कर मौत हो चुकी है। हादसे का शिकार हुए कई अन्य लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की जांच टीमें अब इस बात का पता लगा रही हैं कि औद्योगिक उपयोग के लिए आने वाले इस जानलेवा मेथनॉल को अवैध शराब माफियाओं तक कैसे पहुंचाया गया।
औद्योगिक उपयोग के लिए भी घातक
मेथनॉल (जिसे मिथाइल अल्कोहल या वुड अल्कोहल भी कहा जाता है) एक बेहद शक्तिशाली और खतरनाक रासायनिक यौगिक है। सामान्य अल्कोहल यानी इथेनॉल के विपरीत, मेथनॉल का सेवन इंसानों के लिए पूरी तरह से वर्जित और अत्यंत घातक माना जाता है। रसायन विज्ञान के दृष्टिकोण से, मेथनॉल एक औद्योगिक रसायन है जिसका बड़े पैमाने पर उपयोग पेंट थिनर, एंटीफ्रीज, सॉल्वैंट्स, फॉर्मेल्डिहाइड के निर्माण और विभिन्न प्रकार के सिंथेटिक केमिकल उत्पादों में एक प्रमुख घटक के रूप में किया जाता है। इसकी अत्यधिक विषाक्तता के कारण इसे कभी भी उपभोग के योग्य नहीं माना गया है, लेकिन इसके बावजूद यह अक्सर गंभीर हादसों की मुख्य वजह बनता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार, मेथनॉल का मानव शरीर पर प्रभाव किसी अत्यंत जहरीले डंक की तरह होता है। ताज्जुब की बात यह है कि शरीर के भीतर पहुंचने पर मेथनॉल सीधे तौर पर तुरंत नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि असली खतरा तब शुरू होता है जब यह मानव लिवर (यकृत) में प्रवेश करता है। लिवर में मौजूद एंजाइम मेथनॉल को तोड़कर पहले फॉर्मेल्डिहाइड और फिर फॉर्मिक एसिड नाम के एक भयंकर एसिड में बदल देते हैं। यह फॉर्मिक एसिड वही रसायन है जो लाल चींटियों और कुछ जहरीले कीड़ों के डंक में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। जब शरीर में इसकी मात्रा बढ़ती है, तो यह खून को अत्यधिक अम्लीय (एसिडिक) बना देता है, जिससे कोशिकाओं की ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं।