-क्षेत्रीय बिजली व्यापार से भारत की सालाना आय करीब 1.1 से 1.2 अरब डॉलर
नई दिल्ली | दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका केवल एक बड़े बिजली उपभोक्ता देश की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति केंद्र के रूप में भी लगातार मजबूत हो रही है। भारत अपने घरेलू बिजली ग्रिड का विस्तार करने के साथ बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ बिजली व्यापार कर रहा है। भूटान के साथ भी भारत का ऊर्जा संबंध है, हालांकि वहां से भारत मुख्य रूप से जलविद्युत खरीदता है। क्षेत्रीय बिजली व्यापार से भारत की सालाना आय करीब 1.1 से 1.2 अरब डॉलर यानी करीब 9 हजार से 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जाती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत से बिजली खरीदने वाले देशों में बांग्लादेश सबसे बड़ा बाजार है। दोनों देशों के बीच हुए कई समझौतों के तहत करीब 2 हजार से 2,650 मेगावाट तक बिजली की आपूर्ति की जाती है। बांग्लादेश में विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और कोयला, गैस जैसे ईंधनों के आयात में आ रही कठिनाइयों के कारण बिजली संकट गहरा गया है। ऐसे में वहां भारत से अतिरिक्त बिजली और डीजल आपूर्ति की मांग बढ़ी है। बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति में झारखंड के गोड्डा स्थित अडानी पावर संयंत्र की अहम भूमिका है। इसके अलावा पीटीसी इंडिया, सेम्बकॉर्प और एनवीवीएन यानी एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम जैसी कंपनियां भी बिजली आपूर्ति से जुड़ी हैं।
हालांकि बकाया भुगतान में देरी के कारण कुछ समय से आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ने की खबरें भी सामने आई हैं। नेपाल के साथ भारत का बिजली व्यापार दोतरफा है। सर्दियों में जलस्तर घटने से नेपाल का जलविद्युत उत्पादन कम होता है, तब वह भारत से बिजली खरीदता है। वहीं मानसून और अधिक जल प्रवाह के दौरान नेपाल अतिरिक्त बिजली भारत को बेचता है। इस तरह दोनों देशों के बीच मौसम और उत्पादन क्षमता के मुताबिक ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है। भूटान के साथ भारत का संबंध मुख्य रूप से जलविद्युत आयात पर आधारित है। भूटान के कई बड़े जलविद्युत परियोजनाओं में भारत की भूमिका रही है और वहां उत्पादित अतिरिक्त बिजली भारत खरीदता है। म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों को भी भारत सीमित मात्रा में बिजली उपलब्ध कराता है। वहीं श्रीलंका के साथ समुद्र के नीचे ट्रांसमिशन केबल के जरिए बिजली ग्रिड जोड़ने की योजना पर चर्चा जारी है। दोनों देश नवीकरणीय ऊर्जा और संपूर सौर ऊर्जा परियोजना के जरिए ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

