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इसी साल सीबीएसई के दो पेपर लीक मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को १० आरोपियों के खिलाफ अपनी फाइनल जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी। यह रिपोर्ट १०वीं क्लाथ के मैथ्स और १२वीं क्लास का इकनॉमिक्स के पेपर लीक की जांच से जुड़ी है, जिसमें पुलिस ने १० आरोपियों के खिलाफ ७८ गवाह खड़े किए हैं।
पुलिस ने चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट (ईस्ट) की कोर्ट में आईपीसी के तहत अमानत में खयानत, सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वासघात, धोखाधड़ी, सबूत नष्ट करने और आपराधिक साजिश के आरोपों में यह चार्जशीट दायर की है। डीसीपी, क्राइम ब्रांच राम गोपाल नायक ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जांच में आरोपियों द्वारा दो तरह से पेपर लीक किए जाने का पता चला-हैंडरिटन और प्रिंटिंग। दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित मदर खगसा नाम के स्कूल से यह लीकेज शुरू हुई। उन्होंने बताया कि आरोपियों का इरादा पेपर होने से पहले इसे सर्कुलेट करने का था। डीसीपी नायक की टीम को १२वीं के पेपर लीक की जांच का जिम्मा सौंपा था, लेकिन बाद में उन्हीं की टीम ने दोनों मामलों की जांच की। एक एनजीओ के जरिए यह मुद्दा हाईकोर्ट भी पहुंचा था। पेपर लीक की वजह से २८ लाख स्टूडेंट्स की परेशानियों को हाई कोर्ट के सामने रखते हुए एनजीओ मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने हालांकि मांग नहीं मानी। सीबीएसई ने अपनी जांच के बाद १०वीं का मैथ्स का पेपर दोबारा नहीं कराया, लेकिन १२वीं क्लास के इकनॉमिक्स के पेपर को दोबारा से लिया था।
झा/देवेन्द्र/ईएमएम/२२/दिसम्बर/२०१८/

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