ढाका । बांग्लादेश में गुरुवार यानी 12 फरवरी को होने जा रहे आम चुनाव के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। जमीनी स्तर पर चुनाव प्रचार का शोर आज थम जाएगा, लेकिन डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के बीच चल रही जंग अब भी चरम पर है। इस बार का चुनाव मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ-साथ शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उभरी नई राजनीतिक ताकतों के बीच मुकाबला माना जा रहा है।
इस चुनावी माहौल में सबसे दिलचस्प बात यह है कि राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए क्रिकेट और भारत विरोधी भावनाओं का सहारा ले रहे हैं। विभिन्न दलों के समर्थकों द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से निर्मित वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि नई सरकार आने पर विश्व कप ढाका आएगा। टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की हार को राष्ट्रीय गरिमा से जोड़ते हुए जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों ने इसे विदेशी हस्तक्षेप और अन्याय का परिणाम बताया है। उनका दावा है कि उनके नेतृत्व वाली सरकार वैश्विक स्तर पर बांग्लादेश का गौरव वापस लाएगी और क्रिकेट में बड़ी सफलताएं दिलाएगी।
वहीं, शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों से जन्मी नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) ने इस बार सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। एनसीपी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद में भारत के प्रभाव के विरोध में बैंगला रैली का आयोजन किया, जिसमें भारतीय मैचों के बहिष्कार की अपील की गई। पार्टी के घोषणापत्र में भारत का नाम लेकर सीमा पर होने वाली मौतों, नदियों के जल विवाद और आंतरिक मामलों में कथित हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एनसीपी नेताओं का कहना है कि यदि द्विपक्षीय वार्ता विफल रहती है, तो वे शेख हसीना को वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे। चुनाव प्रचार के दौरान एनसीपी नेता दिल्ली में शरण लिए हुए अवामी लीग के नेताओं को निशाना बनाते हुए उन पर तीखे हमले कर रहे हैं। दूसरी ओर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने कूटनीतिक सावधानी बरतते हुए अपने आधिकारिक घोषणापत्र में भारत का सीधे तौर पर जिक्र करने से परहेज किया है। हालांकि, पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान के हालिया बयानों ने उनके कठोर रुख के संकेत दिए हैं। रहमान ने फरक्का बैराज के विकल्प के रूप में पद्मा बैराज के निर्माण का प्रस्ताव रखा है, जिसे क्षेत्रीय जल राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, बांग्लादेश का यह चुनाव विकास के मुद्दों से ज्यादा भावनाओं, खेल और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के इर्द-गिर्द सिमटा नजर आ रहा है।

