जयगुरुदेव आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब : गुरु पादुका पूजन के साथ स्थापना महोत्सव शुरू

धार्मिक

:: सत्संग और ध्यान में रमें हजारों श्रद्धालु; आज निकलेगी 20 किमी लंबी भव्य शाकाहार संदेश यात्रा ::
इंदौर । बायपास स्थित बाबा जयगुरुदेव आश्रम में शनिवार से तीन दिवसीय स्थापना महोत्सव का उल्लासमय शुभारंभ हुआ। गुरु परंपरा के प्रति अगाध श्रद्धा लिए राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देशभर से आए हजारों अनुयायियों के हुजूम ने आश्रम परिसर को लघु भारत के रूप में बदल दिया। शनिवार सुबह विधि-विधान से किए गए गुरु पादुका पूजन के साथ महोत्सव की शुरुआत हुई, जिसके बाद सत्संग और कीर्तन की अविरल गंगा बही।
महोत्सव के लिए पूरे परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा और पुष्पों से सजाया गया है। आश्रम के अध्यक्ष चतर सिंह राजावत, मोहन सलवारिया एवं छोटेलाल जायसवाल ने बताया कि महोत्सव के प्रथम दिन ही जनसमूह की उपस्थिति ने श्रद्धा के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
:: तनाव मुक्ति का आधार है ध्यान ::
महोत्सव के पहले दिन आयोजित सत्संग में ग्वालियर के सुशील कुमार लुल्ला, हरदोई के महेंद्र सिंह और महाराष्ट्र के समाधान पाटिल ने आध्यात्मिक विचार रखे। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता मानसिक तनाव जीवन में दुख घोल रहा है। इससे मुक्ति के लिए गुरु का बताया ध्यान ही सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है। उन्होंने कहा कि गुरु ही जीवन को उत्कृष्ट स्थान प्रदान करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने से ही जीवात्मा की सद्गति संभव है। वक्ताओं ने प्रेरित किया कि एक याचक की तरह अंतर्मन के घाट पर प्रभु की दया की याचना करते रहें, तभी कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
:: जीवात्मा के कल्याण का मार्ग : शाकाहार
सत्संग में वक्ताओं ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शरीर बड़े भाग्य से मिला है। जीवात्मा को सचखंड पहुँचाने के लिए शाकाहारी रहना और दया, दीनता व उपकारी स्वभाव रखना अनिवार्य है। उन्होंने आह्वान किया कि जीते-जी ऐसे संत की खोज करें जिसने अपनी आत्मा को जगा लिया हो।
:: 20 किमी लंबी प्रभात फेरी आज ::
आश्रम से जुड़े हजारों श्रद्धालु रविवार सुबह 8 बजे तेजाजी नगर स्थित आश्रम से एक विशाल वाहन रैली (प्रभात फेरी) निकालेंगे। लगभग 20 किलोमीटर से अधिक लंबी यह यात्रा आईटी पार्क, भंवरकुआं, तीन इमली और देवगुराड़िया होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुँचेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जन-जन को शाकाहार अपनाने, जीव दया और नशा मुक्ति का संदेश देना है।
:: आस्था के विविध रंग ::
गुलाबी आभा : पिछले दो दिनों से पिंक (गुलाबी) वस्त्रों में अनुयायियों के पहुँचने का सिलसिला जारी है, जिससे समूचा बायपास क्षेत्र आध्यात्मिक रंग में रंगा नज़र आ रहा है।
आत्मिक शांति : बाबा के दर्शन के उपरांत भक्त एक-चित्त होकर मौन ध्यान और आत्मशांति का अनुभव करते दिखे।
अनुशासन : हर उम्र के महिला, पुरुष और वृद्ध जयगुरुदेव के जयकारों के साथ अनुशासित रूप से सेवा कार्यों में जुटे रहे।