नहीं रहे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. भरत छापरवाल

इंदौर

इंदौर । इंदौर के प्रख्यात शिक्षाविद्, ख्यातनाम बाल रोग विशेषज्ञ और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. भरत छापरवाल का रविवार सुबह लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही शहर के शैक्षणिक, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। डॉ. छापरवाल अपनी सादगी, अनुशासन और संस्थागत सुधारों के लिए सदैव याद किए जाएंगे।
डॉ. छापरवाल की गिनती उन विरले कुलपतियों में होती है, जिन्होंने लंबे समय तक देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का नेतृत्व किया। वे वर्ष 1996 से 2004 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए कुलपति के पद पर आसीन रहे। उनके कार्यकाल को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के स्वर्ण युग के रूप में देखा जाता है।
मूलतः एक समर्पित चिकित्सक रहे डॉ. छापरवाल एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर और प्रतिष्ठित एमवाय अस्पताल के अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके थे। चिकित्सा जगत में उनके अनुभव और बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में उनकी सेवाओं का लाभ हजारों परिवारों को मिला।
सेवानिवृत्ति के पश्चात भी डॉ. छापरवाल विश्राम के बजाय रचनात्मक कार्यों में संलग्न रहे। वे इंदौर की प्रतिष्ठित संस्था अभ्यास मंडल सहित शहर की अनेक सामाजिक और बौद्धिक संस्थाओं से गहराई से जुड़े थे। वे अंत समय तक शहर के विकास और शैक्षणिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए विचार-विमर्श और मार्गदर्शन प्रदान करते रहे।
उनके निधन पर शहर के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, विश्वविद्यालय परिवार और चिकित्सा जगत की विभिन्न संस्थाओं ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे इंदौर की अपूरणीय क्षति बताया है।