:: संकल्प से समाधान की झोनवार समीक्षा : बोले- 7 दिन से अधिक लंबित प्रकरणों पर सीधे गिरेगी गाज ::
इंदौर । जनसमस्याओं के निराकरण में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नगर निगम प्रशासन ने दंडात्मक कार्रवाई का अभियान छेड़ दिया है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने सिटी बस सभाकक्ष में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कार्य के प्रति लापरवाही बरतने पर झोन क्रमांक 10 (वार्ड 43) के संबंधित उपयंत्री के 5 दिवस का वेतन राजसात करने के निर्देश जारी किए हैं।
बैठक के दौरान जब श्रीनगर क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा की गई, तो यह तथ्य सामने आया कि संबंधित उपयंत्री द्वारा इसे लंबे समय तक लंबित रखा गया। आयुक्त ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि नगर निगम की प्राथमिकता नागरिकों को स्वच्छ पेयजल और सुचारू सीवरेज व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कड़े लहजे में हिदायत दी कि सीएम हेल्पलाइन, इन्दौर 311 एप और जलसुनवाई में प्राप्त किसी भी शिकायत का निराकरण अधिकतम 7 दिनों की अनिवार्य समयसीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
:: एसटीपी और पर्यावरण मानकों पर सख्त निगरानी ::
आयुक्त ने सीवरेज प्रबंधन की समीक्षा करते हुए उन कॉलोनियों को रडार पर लिया है जहाँ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का संचालन मानक प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसी कॉलोनियों की सूची तैयार कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि संकल्प से समाधान शिविर और जनता चौपाल के माध्यम से प्राप्त फीडबैक की सतत मॉनिटरिंग की जाए।
:: यातायात सुगमता और निर्माण गुणवत्ता पर बल ::
शहर की अधोसंरचना पर चर्चा करते हुए आयुक्त ने निर्देशित किया कि विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो। उन्होंने कहा कि सड़कों के रेस्टोरेशन (पुनर्स्थापना) का कार्य उच्च गुणवत्ता का होना चाहिए ताकि यातायात में कोई अवरोध न आए। विशेष रूप से चौराहों के लेफ्ट टर्न और जंक्शनों के सुधार कार्यों को प्रायोरिटी मोड पर समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था सुगम बनी रहे।
बैठक में समस्त अपर आयुक्त, उपायुक्त, कार्यपालन यंत्री, झोनल अधिकारी एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

