पायलट-टू-एयरक्राफ्ट अनुपात: एक विमान पर औसतन 8 पायलट, इंडिगो में सबसे कम

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संसद में सरकार ने दी जानकारी— दिसंबर में फ्लाइट ऑपरेशन गड़बड़ी पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना
-देश में टोल कलेक्शन 61 हजार करोड़ पार
नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में पायलट-टू-एयरक्राफ्ट अनुपात घरेलू एयरलाइंस के मुकाबले सबसे कम है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गुरुवार को संसद में बताया कि इंडिगो में यह अनुपात 7.6 है, यानी औसतन एक विमान के लिए करीब 8 पायलट उपलब्ध हैं। यह जानकारी नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में दी।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी अनुसार, किसी भी विमान के लिए एक से अधिक पायलट आवश्यक होते हैं क्योंकि एक विमान दिनभर में कई उड़ानें संचालित करता है और पायलटों को नियमों के अनुसार आराम भी देना होता है। इसी कारण एयरलाइंस अपने बेड़े के मुकाबले कई पायलट नियुक्त करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पायलट-टू-एयरक्राफ्ट अनुपात के मामले में स्पाइस-जेट सबसे आगे है, जहां प्रति विमान 9.4 पायलट हैं। इसके बाद अकासा एयर में यह अनुपात 9.33 है। वहीं एयर इंडिया में प्रति विमान 9.1 पायलट और उसकी सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस में यह अनुपात 8.8 है।
इंडिगो में कुल 5,200 पायलट कार्यरत हैं, जिनमें 970 महिला पायलट शामिल हैं। वहीं एयर इंडिया में 3,123 पायलट हैं, जिनमें 508 महिलाएं हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस में 1,820 पायलट हैं, जिनमें 234 महिला पायलट हैं। अकासा एयर में 761 पायलट हैं, जिनमें 76 महिलाएं शामिल हैं, जबकि स्पाइसजेट में कुल 375 पायलट हैं और इनमें 58 महिला पायलट हैं।
इंडिगो के प्रबंधन में भी हाल ही में बदलाव देखने को मिला है। एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर एलबर्स ने 10 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले दिसंबर 2025 में फ्लाइट ऑपरेशन में गड़बड़ी के कारण करीब तीन लाख यात्री प्रभावित हुए थे। इसके बाद विमानन नियामक डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने एयरलाइन पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।
टोल वसूली 61 हजार करोड़ के पार
इधर, संसद में एक अन्य जानकारी देते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि देश में राष्ट्रीय राजमार्गों से टोल वसूली 61 हजार करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में टोल कलेक्शन 61,408.15 करोड़ रुपए रहा, जबकि 2020-21 में यह 27,926.67 करोड़ रुपए था। यानी पांच वर्षों में टोल वसूली में लगभग 120 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।