नई दिल्ली । भाजपा ने पश्चिम बंगाल और केरल के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी दोनों राज्यों में मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा घोषित किए बिना चुनावी रण में उतरेगी। नई दिल्ली में हुई केंद्रीय नेतृत्व की उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि चुनाव पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और केंद्र सरकार की उपलब्धियों के दम पर लड़ा जाएगा। पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों और केरल की सभी 140 सीटों पर एनडीए गठबंधन अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार है।
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में भाजपा एक आक्रामक रणनीति अपना रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बार अपने अधिकांश मौजूदा विधायकों के साथ-साथ पूर्व सांसदों को भी टिकट देने जा रही है। इतना ही नहीं, चुनावी समीकरणों को साधने के लिए कई मौजूदा सांसदों को भी विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा जा सकता है। पार्टी का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी और सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाया जा सकेगा। हालांकि, मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा गया है, ताकि सामूहिक नेतृत्व के संदेश के साथ चुनाव लड़ा जा सके।
वहीं, केरल में भाजपा अपने सहयोगियों ट्वेंटी 20 और भारतीय जन धर्म सेना के साथ गठबंधन को अंतिम रूप दे चुकी है। तय फॉर्मूले के अनुसार, भाजपा 90 से 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि शेष 40 से 50 सीटें सहयोगियों के बीच बांटी जाएंगी। दिलचस्प बात यह है कि पिछले चुनाव में मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने वाली भाजपा ने इस बार चेहरा न देने का फैसला किया है। चुनावी पोस्टरों में प्रधानमंत्री मोदी के साथ केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर, साबू एम. जैकब और टी. वेल्लापेल्ली जैसे स्थानीय चेहरों को प्रमुखता दी जाएगी।
केरल में भाजपा हालिया स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों से खासी उत्साहित है, विशेषकर तिरुवनंतपुरम में मिली ऐतिहासिक सफलता के बाद जहां पार्टी ने पहली बार अपना मेयर बनाया है। पार्टी को उम्मीद है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ता जनाधार और केंद्र की कल्याणकारी योजनाएं उसे केरल और बंगाल दोनों राज्यों में निर्णायक बढ़त दिलाएंगी। दोनों राज्यों में उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा जल्द ही होने की संभावना है।

