15 दिन में काम नहीं सुधरा तो ब्लैक लिस्ट होंगे ठेकेदार, कटेगी परफॉर्मेंस गारंटी

इंदौर

:: अमृत योजना के बजट उपयोग में देश में 7वें नंबर पर चमका मध्य प्रदेश, मार्च तक फूंक-फूंक कर पाई-पाई का हुआ शत-प्रतिशत इस्तेमाल ::
भोपाल/इंदौर । सुस्त रफ्तार से काम करने वाले और लापरवाही बरतने वाले संविदाकारों (ठेकेदारों) पर नगरीय प्रशासन विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने मैदानी अफसरों और ठेकेदारों को दोटूक हिदायत देते हुए कहा है कि जो भी ठेकेदार रेड लिस्ट (खराब प्रदर्शन) में शामिल हैं, वे यदि अगले 15 दिनों के भीतर काम में तेजी नहीं लाते हैं, तो उनकी परफॉर्मेंस गारंटी राजसात कर उन्हें सीधे ब्लैक लिस्ट (काली सूची) में डाल दिया जाएगा। आयुक्त ने अमृत 2.0 योजना के तहत चल रही जलप्रदाय परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में यह कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ किया कि सुस्त गति वाली परियोजनाओं के सभी संविदाकारों पर लिक्विडेटेड डैमेजेस (एलडी) यानी हर्जाना भी लगाया जाएगा।
बैठक में आयुक्त संकेत भोंडवे ने एक बड़ी प्रशासनिक और वित्तीय उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि संविदाकारों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की बदौलत भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवंटित राशि का मार्च 2026 तक शत-प्रतिशत (100%) उपयोग कर लिया गया है। इस बेहतरीन वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन का ही परिणाम है कि देश में मध्य प्रदेश अब अमृत योजना के क्रियान्वयन में सातवें पायदान पर पहुंच गया है।
:: राडार पर आई 122 कम प्रगति वाली परियोजनाएं, अफसर करेंगे सीधी मॉनिटरिंग ::
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान विभाग ने उन 122 जलप्रदाय परियोजनाओं की बिंदुवार कुंडली खंगाली, जिनकी प्रगति फ़िलहाल बेहद धीमी या असंतोषजनक पाई गई है। आयुक्त ने इन परियोजनाओं की कार्य गुणवत्ता, समय सीमा और तकनीकी अड़चनों की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने संभागों के संयुक्त संचालकों, अधीक्षण यंत्रियों और कार्यपालन यंत्रियों को निर्देश दिए कि वे खुद इन कमजोर कड़ियों की निरंतर मॉनिटरिंग करें ताकि शहर के लोगों को पेयजल की योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
:: मैदानी अमले से लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तक खिंचे रहे अधिकारी ::
समीक्षा बैठक में विभागीय सक्रियता का आलम यह रहा कि नगरीय विकास विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, टीएल और पीडीएमसी के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। वहीं, प्रदेश के नगरीय निकायों के जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित संविदाकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए इस बैठक से सीधे जुड़े रहे और अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश की।

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