-प्राचीन वास्तुकला और चमत्कारिक कहानी भक्तों को यहां खींच लाती है
हैदराबाद । हैदराबाद के पास अलमासगुडा बडंगपेट में एक ऐसा स्थान है जो सदियों पुरानी विरासत और गहरी आस्था को खुद में समेटे हुए है। श्री काशी बुग्गा शिवालयम यह मंदिर करीब 700 साल से भी ज्यादा पुराना है। यह न केवल अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है बल्कि इसके पीछे छिपी एक चमत्कारिक कहानी भक्तों को यहां खींच लाती है। शहर की भीड़भाड़ से दूर यह मंदिर परिसर श्रद्धालुओं को एक गहरी आध्यात्मिक शांति और सात्विक परिवेश का अनुभव कराता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस मंदिर का नाम ‘काशी बुग्गा’ पड़ने के पीछे दिलचस्प और चमत्कारिक इतिहास जुड़ा है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक प्राचीन काल में यहां के कुछ भक्त काशी की तीर्थयात्रा पर गए थे। वहां गंगा नदी में स्नान के दौरान उनका एक पवित्र कलश खो गया था, लेकिन जब वे अपनी यात्रा पूरी कर वापस लौटे। तो उन्हें वही कलश आश्चर्यजनक रूप से इसी मंदिर परिसर के ‘कोनेरू’ पवित्र कुंड में तैरता हुआ मिला। तभी से इस स्थान को काशी के समान ही पवित्र माना जाने लगा और इसका नाम काशी बुग्गा से सप्रसिद्ध हो गया।
मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है, जिसके गर्भगृह में पंचदेवों की उपस्थिति है। यहां भगवान शिव के साथ माता पार्वती. भगवान गणेश। कुमारस्वामी और सूर्य देव की दिव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। मुख्य मंदिर के अलावा परिसर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी और संकटमोचन हनुमान के भी भव्य मंदिर बने हैं। मंदिर परिसर इतना विशाल और व्यवस्थित है कि यहां भक्तों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह के साथ-साथ एक सुंदर गौशाला भी बनी हुई है, जो आने वाले श्रद्धालुओं को ग्रामीण और सात्विक वातावरण का अहसास कराती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कार्तिक मास के दौरान यहां भक्तों का भारी तांता लगा रहता है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह स्थान केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता बल्कि अपनी 700 साल पुरानी बनावट के कारण एक अहम ‘हेरिटेज साइट’ के रूप में भी उभरा है। प्राचीन पत्थरों की नक्काशी और शांत वातावरण इसे एक उत्तम पर्यटन और आध्यात्मिक गंतव्य बनाता है। यदि आप इतिहास और श्रद्धा के मेल वाली किसी जगह की तलाश में हैं। तो हैदराबाद का यह काशी बुग्गा मंदिर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।

