तिरंगा लगे जहाज ने होर्मुज जलडमरूमध्य किया पार, अब भी 17 भारतीय जहाज फंसे

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-भारत पहुंचने पर एलपीजी को लेकर चल रही किल्लत से मिलेगी राहत
नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट संकट के बीच शुक्रवार को सातवां भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर, ग्रीन सानवी, होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक छह एलपीजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार करके भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं। अब सातवां टैंकर भी होर्मुज क्रॉस करके भारत की ओर बढ़ रहा है। इस जहाज पर करीब 44,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी है। इसके आने से एलपीजी को लेकर चल रही किल्लत से राहत मिलेगी। होर्मुज के पश्चिम में अब भी 17 भारतीय जहाज फंसे हैं। इनमें दो एलपीजी से लदे जहाज ग्रीन आशा और जग विक्रम हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक एलपीजी से लदे ये दोनों जहाज ग्रीन आशा और जग विक्रम भी जल्द ही होर्मुज से निकलकर भारत की ओर रवाना हो सकते हैं। जानकारों ने बताया कि तीन एलपीजी ले जाने वाले भारतीय जहाज वर्तमान में फारस की खाड़ी स्थित अबू मूसा द्वीप के उत्तर-पूर्व में भटक रहे हैं। वे भारतीय नौसेना के निर्देशों का पालन करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलने के आदेश की प्रतीक्षा में हैं।
इस बीच एक विदेशी जहाज, जो कथित तौर पर ईरान से भारत के लिए तेल ले जा रहा था, उसने अपनी यात्रा के दौरान ही अपना डेस्टिनेशन प्वाइंट अचानक बदल दिया। अब वह चीन की ओर बढ़ रहा है। वैश्विक विश्लेषण फर्म केप्लर के प्रमुख विश्लेषक ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के मामले में इस तरह की यात्रा के दौरान गंतव्य परिवर्तन कोई नई बात नहीं है। यह वित्तीय शर्तों और काउंटर पार्टी रिस्क के प्रति ट्रेड फ्लो की बढ़ती संवेदनशीलता को उजागर करता है। एक्सपर्ट ने कहा कि कच्चा तेल लेकर जा रहे शिप के अचानक चीन की ओर मुड़ने के बीच अहम वजह पेमेंट का माना जा रहा। इसमें पहले की 30-60 दिन की लोन अवधि से हटकर अग्रिम या निकट-अवधि के सेटलमेंट की ओर बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भुगतान संबंधी समस्याएं हल हो जाती हैं, तो माल अभी भी किसी भारतीय रिफाइनरी तक पहुंच सकता है। विश्लेषक ने आगे कहा कि यह इस बात को दर्शाता है कि चीन के अलावा अन्य देशों में ईरानी कच्चे तेल के प्रवाह को निर्धारित करने में वाणिज्यिक शर्तें रसद के समान ही अहम होती जा रही हैं। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि कच्चे तेल से लदे इस शिप का फाइनल डेस्टिनेशन यही रहने वाले है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी तो ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन ट्रांसपोंडर में दर्शाया गया है ये गंतव्य अंतिम है और यात्रा के दौरान इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, इसमें आगे भी बदलाव हो सकते हैं। वहीं अगर ये टैंकर वास्तव में वडीनार पहुंच जाता, तो यह छह सालों में भारत को ईरान से कच्चे तेल की पहली खेप होती।