रिजिजू ने मुस्लिम आबादी की तुलना पारसी से की, ओवैसी ने किया पलटवार

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बोले- मंत्री, मुसलमानों को मौलिक अधिकारों से वंचित करने कर रहे दुष्प्रचार
नई दिल्ली । भारत में अल्पसंख्यक की परिभाषा और स्थिति को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस हुई। यह विवाद तब शुरू हुआ जब रिजिजू ने मुस्लिम आबादी की तुलना पारसी समुदाय से की, जिस पर ओवैसी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि मंत्री मुसलमानों को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत मिलने वाले मौलिक अधिकारों से वंचित करने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं।
रिजिजू ने कहा कि यदि हम भारत में मुस्लिम आबादी को एक अलग देश के रूप में देखें तो यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश हो सकता है। दूसरी ओर करीब 52,000 की आबादी वाला पारसी समुदाय महज एक कस्बा या गांव जैसा है। इसके बावजूद देश में पारसियों और मुसलमानों दोनों को अल्पसंख्यक का दर्जा मिला है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अल्पसंख्यक समुदायों को बहुसंख्यक समुदाय की तुलना में सरकार से अधिक फंड और सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जो कुछ भी मिलता है वह अल्पसंख्यकों को भी मिलता है, लेकिन जो अल्पसंख्यकों को मिलता है, वह हिंदुओं को नहीं मिलता है।
ओवैसी ने रिजिजू के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एक्स पर एक गणित का सरल सवाल पूछा। हिंदुओं और मुसलमानों की आबादी की तुलना करते हुए ओवैसी ने लिखा, 79.8फीसदी बड़ा है या 14फीसदी? यदि हिंदू बहुसंख्यक समुदाय हैं तो हर गैर-हिंदू समूह स्वाभाविक रूप से एक अल्पसंख्यक समुदाय है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि मंत्री मुसलमानों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं। इसके जवाब में रिजिजू ने ओवैसी को भारत में मुसलमानों का सबसे बड़ा नेता बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब मुस्लिम लीग पार्टी बन गई है। रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत में हर धर्म फला-फूला है, लेकिन प्रतिशत के लिहाज से केवल हिंदुओं और पारसियों की आबादी कम हुई है।
वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर छह धार्मिक समुदायों को अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता मिली है। मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन। यह केंद्रीय अधिसूचना इन समुदायों को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और वक्फ संरक्षण का लाभ उठाने का अधिकार देती है। पिछले कुछ सालों में अल्पसंख्यक दर्जे को राष्ट्रीय स्तर के बजाय राज्य-वार तय करने की मांग उठती रही है। दक्षिणपंथी विचारकों का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर जैसे मुस्लिम-बहुसंख्यक राज्यों में मुसलमानों को केंद्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक नहीं माना जाना चाहिए।
2011 की जनगणना में हिंदू
राज्यल प्रतिशत
लक्षद्वीप : 2.5
मिजोरम : 2.75
नागालैंड : 8.75
मेघालय : 11.53
जम्मू-कश्मीर : 28.44
अरुणाचल : 29
मणिपुर : 31.39
पंजाब : 38.40