हरीश राणा पलकें झपकाते और घूंट भरने का वीडियो वायरल, देख लोग हुए भावुक

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13 साल के कोमा में, कोर्ट के फैसले के बाद चिकित्सकीय निगरानी में लेंगे अंतिम सांस
नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें 32 साल के हरीश राणा का परिवार उन्हें अंतिम विदाई दे रहा है। यह विदाई साधारण नहीं है, यह एक ऐसी विदाई है जो 13 साल के लंबे इंतजार कोमा की यंत्रणा और कानूनी लड़ाई के बाद मिली है। हरीश को अब दिल्ली के एम्स के पैलिएटिव केयर यूनिट में स्थानांतरित किया गया है, जहां वे आने वाले हफ्तों में चिकित्सकीय निगरानी के तहत अंतिम सांस लेंगे। वीडियो में हरीश को अपनी पलकें झपकाते और घूंट भरते देखा जा सकता है। पिछले 13 सालों में वह बस यही दो हरकतें कर रहा है। एक हादसे में गिरने से उनके दिमाग़ को गंभीर नुकसान पहुंचा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वायरल वीडियो में एक ब्रह्मा कुमारी बहन को उदास मुस्कान के साथ उनके माथे पर प्यार से हाथ फेरते हुए भी दिखाया गया है, जबकि हरीश की मां पीछे से चुपचाप देख रही हैं। वीडियो में ब्रह्मा कुमारी लवली कहती हैं, सबको माफ़ करते हुए, सबसे माफ़ी मांगते हुए, तुम जाओ। राणा परिवार लंबे समय से ब्रह्मा कुमारी आंदोलन से जुड़ा रहा है। यह महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला एक आध्यात्मिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1937 में हुई थी और इसका मुख्यालय माउंट आबू में है।
यह पल सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरीश राणा को गरिमा के साथ इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के कुछ दिनों बाद आया है। यह भारत में पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा-मृत्यु) का पहला ऐतिहासिक मामला है, जिसमें कोर्ट ने आदेश दिया है। कोर्ट ने डॉक्टरों की इस राय को माना कि राणा कभी ठीक नहीं हो पाएंगे। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि जिन नली के ज़रिए उन्हें खाना दिया जा रहा है और उन्हें ज़िंदा रखा जा रहा है, वे सिर्फ़ उनके दर्द को बढ़ा रही हैं। यह ऐसा दर्द है जिसे 32 साल के हरीश किसी को बता भी नहीं पा रहे। 11 मार्च को कोर्ट के आदेश के बाद, हरीश राणा को दिल्ली के एम्स की पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ़्ट कर दिया गया। वहां एक मेडिकल बोर्ड उनके जीवन के अंतिम समय की देखभाल की योजना बनाएगा।
हरीश के परिवार को अस्पताल में ही जीवन-रक्षक उपकरणों को हटाने की अनुमति मिल गई, जिससे हरीश राणा गरिमा के साथ अपनी जान दे पाएंगे। इस मामले ने भारत में जीवन के अंतिम समय के अधिकारों को लेकर डॉक्टरों और वकीलों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। पंजाब यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग के छात्र हरीश राणा को 2013 में अपने पेइंग गेस्ट आवास की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद सिर में चोटें आई थीं, और तब से वह कोमा में हैं। फैसले के तुरंत बाद, राणा के पिता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके बेटे से कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली हटाने की अनुमति देने से परिवार को कोई निजी लाभ नहीं होगा, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला ऐसी ही स्थितियों का सामना कर रहे अन्य लोगों की मदद कर सकता है।