इंदौर में कौमी एकता की मिसाल: शहर काजी ने की गाय को ‘राष्ट्रीय धरोहर’ घोषित करने की मांग, नमाजियों ने हाथ उठाकर दिया समर्थन

इंदौर

इन्दौर | देश में सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली एक बेहद अभूतपूर्व तस्वीर आज इंदौर शहर से सामने आई है। इंदौर के सदर बाजार स्थित ऐतिहासिक ईदगाह मैदान पर आयोजित एक बड़े धार्मिक और सामाजिक एकत्रीकरण के दौरान, शहर काजी इशरत अली ने सार्वजनिक मंच से भारत सरकार से गाय (गौमाता) को राष्ट्रीय धरोहर (National Heritage) घोषित करने की मांग उठाई है। काजी साहब के इस प्रगतिशील और सौहार्दपूर्ण प्रस्ताव का वहाँ मौजूद हजारों नमाजियों और मुस्लिम समाज के लोगों ने एक सुर में अपने दोनों हाथ हवा में उठाकर ज़ोरदार समर्थन किया।
सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक सम्मान का बड़ा संदेश –
अपने संबोधन के दौरान शहर काजी इशरत अली ने देश की साझा संस्कृति (गंगा-जमुनी तहज़ीब) पर बल दिया। उन्होंने कहा:
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है और बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाएं इससे गहराई से जुड़ी हैं। समाज में आपसी नफरत, गलतफहमियों और विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करे। इससे गौवंश के अवैध वध और तस्करी पर पूरी तरह से रोक लग सकेगी और देश में भाईचारा मजबूत होगा।
मंच से जैसे ही काजी साहब ने इस पर समाज की राय जाननी चाही, पूरा ईदगाह मैदान सहमति के नारों से गूंज उठा और हजारों लोगों ने हाथ उठाकर स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय भी बहुसंख्यक समाज की आस्था का पूरा सम्मान करता है।
धार्मिक मंच से पर्यावरण और जल संरक्षण की बड़ी पुकार –
इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में केवल सांस्कृतिक सौहार्द की ही बात नहीं हुई, बल्कि शहर काजी ने पर्यावरण के गंभीर होते संकट को लेकर भी समाज को आईना दिखाया। उन्होंने बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के बीच दो बेहद महत्वपूर्ण व्यावहारिक संदेश दिए:

  • रैन वाटर हार्वेस्टिंग (भूजल पुनर्भरण): काजी साहब ने गिरते भूजल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी मुस्लिम भाईयों और देशवासियों से अपील की कि वे आने वाले मानसून में बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेजें। उन्होंने कहा कि हर घर, मस्जिद, मदरसे और व्यावसायिक प्रतिष्ठान में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rainwater Harvesting) अनिवार्य रूप से लगाया जाए, ताकि बारिश का पानी नालियों में बहकर बर्बाद होने के बजाय सीधे जमीन के अंदर (Groundwater Recharge) जा सके।
  • हरियाली और वृक्षारोपण की अपील: उन्होंने विकास के नाम पर काटे जा रहे पेड़ों पर दुख जताया और समाज के हर व्यक्ति से अपने-अपने इलाकों में पौधे लगाने का संकल्प लेने को कहा। विशेष रूप से उन्होंने सहजन की फली (Drumstick/Moringa) के पेड़ लगाने की सलाह दी, जो न केवल पर्यावरण के लिए बेहतरीन हैं बल्कि लोगों को आर्थिक लाभ भी पहुंचा सकते हैं।
    प्रशासनिक और सामाजिक गलियारों में सराहना –
    धार्मिक मंचों से इस प्रकार के प्रगतिशील, सामाजिक और राष्ट्रहित के मुद्दों को उठाए जाने की इंदौर के प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने जमकर सराहना की है। इंदौर पहले से ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में देश में अग्रणी रहा है। जानकारों का मानना है कि जब ऐसे बड़े सामाजिक और धार्मिक गुरु खुद आगे आकर वाटर हार्वेस्टिंग और गौ-संरक्षण जैसी अपीलों का नेतृत्व करते हैं, तो आम जनता के बीच इनका असर कई गुना बढ़ जाता है।
    इंदौर से उठी यह अनूठी आवाज आज पूरे देश के लिए आपसी सम्मान और सस्टेनेबल लिविंग (स्थायी जीवन शैली) का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है।
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    -हिंदू परिवार बग्घी में लेकर पहुंचा शहर काजी को –
    इंदौर में ईद के मौके पर सलवाड़िया परिवार ने 50 साल पुरानी परंपरा निभाई। वे शहर काजी इशरत अली को उनके निवास राज मोहल्ला से ईदगाह मैदान तक शाही बग्घी में लेकर गए। नमाज अदा करने के बाद फिर उन्हें बग्घी में उनके निवास तक छोड़कर आए।सत्यनारायण सलवाड़िया ने बताया कि उनके पिता ने यह परंपरा शुरू की थी, जिसे उनका परिवार आज भी निभा रहा है।

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