कानून से ऊपर नहीं है पर्सनल लॉ, बाल विवाह को नहीं दे सकता मंजूरी

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हाईकोर्ट ने कहा- देश के हरेक नागरिक के लिए विवाह की न्यूनतम आयु तय है
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम जैसे विशेष कानूनों को निष्प्रभावी या ओवरराइड नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि विवाह की आयु के रूप में किशोरावस्था की शुरुआत को मान्यता देने वाला पर्सनल लॉ उन कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता, जो बच्चों के साथ यौन संबंध को अपराध की श्रेणी में रखते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि धर्म की परवाह किए बिना देश के हरेक नागरिक के लिए विवाह की न्यूनतम आयु वही होगी, जो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 साल तय की गई है।
न्यायमूर्ति जे जे मुनीर और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने ये टिप्पणियां पुलिस और ‘चाइल्डलाइन’ की बचाव टीम पर हमला करने और उनके काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करने वाली रुबी और 18 अन्य लोगों की याचिका को खारिज करते हुए कीं। बचाव दल ने बुलंदशहर जिले में 16 साल की मुस्लिम लड़की का प्रस्तावित विवाह रुकवाने के लिए हस्तक्षेप किया था, जिसके बाद उस समय हमला किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि शरीया कानून के तहत लड़की के किशोरावस्था की दहलीज में कदम रखने के बाद ही उसका विवाह किया जा सकता है। कोर्ट ने हालांकि इस दलील को खारिज कर दिया।
खंडपीठ ने कहा कि कोई भी व्यक्तिगत कानून, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह पर लगाए गए प्रतिबंध या पॉक्सो अधिनियम के वैधानिक प्रभावों को निष्प्रभावी नहीं कर सकता। खंडपीठ ने कहा कि अगर 18 साल से कम आयु में विवाह की अनुमति दी जाती है, तो विवाह और यौन संबंधों के परस्पर जुड़े होने के कारण यह स्थिति पॉक्सो अधिनियम के उल्लंघन को वैधता प्रदान करने जैसी होगी। कोर्ट ने बचाव दल के साथ अभद्रता, धमकी और हमला किए जाने और टीम के सदस्यों को अपनी जान बचाने के लिए मजबूर होने संबंधी विवरण वाली प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि पीड़िता को बचाव दल की देखरेख और संरक्षण से जबरन ले जाया गया था, जिसके बाद अंततः उसे फिर से बचाया गया। प्रथम दृष्टया यह सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने का मामला बनता है। प्राथमिकी में जिन अन्य अपराधों का उल्लेख है, उनकी भी गहन जांच जरुरी है।