मप्र में देश का 45% सोयाबीन, अब प्रोसेसिंग से किसानों की कमाई बढ़ाने पर जोर

मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री बोले- कृषि उपज का वैल्यू एडिशन बढ़ेगा तो मिलेगा बेहतर दाम; इंदौर में अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में जुटे 500 से ज्यादा प्रतिनिधि ::
इंदौर । मध्यप्रदेश में देश का करीब 45% सोयाबीन पैदा होता है। अब सरकार इस उत्पादन क्षमता को खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से जोड़ने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इंदौर में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रोसेसिंग और नए बाजारों के जरिए सोया उद्योग को मजबूत किया जा सकता है। इससे कृषि उपज का मूल्य बढ़ाने, किसानों को बेहतर दाम दिलाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) की ओर से आयोजित दो दिवसीय कॉन्क्लेव में देश-विदेश के 500 से ज्यादा प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता, उद्योगपति और प्रगतिशील किसान शामिल हुए। सम्मेलन का विषय ‘आत्मनिर्भर भारत- पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन’ है। इसमें सोयाबीन, खाद्य तेल और प्रोटीन क्षेत्र की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
:: उपज का मूल्य बढ़ेगा तो किसानों को फायदा ::
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन सिर्फ कृषि उपज नहीं, बल्कि किसानों की आय, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार और उत्पादों के विविधीकरण से इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बढ़ने से कृषि उपज का मूल्य संवर्धन होगा। भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिकूल मौसम और अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रदेश के किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
:: 30 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों का जिक्र ::
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें करीब 30 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले थे। उनके अनुसार, इनमें से 30% से अधिक प्रस्तावों को धरातल पर उतारा गया है। सरकार का प्रयास निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सस्ती बिजली, भूमि और जल की उपलब्धता उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। अलग-अलग क्षेत्रों की औद्योगिक संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव भी आयोजित किए गए हैं।
:: इंदौर-भोपाल-जबलपुर क्षेत्र में बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर ::
मुख्यमंत्री ने कहा कि जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्र को मिलाकर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता, प्रसंस्करण क्षमता और बाजार विस्तार पर ध्यान देना जरूरी है।
:: 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों का सम्मान ::
कॉन्क्लेव में सोयाबीन के विनिर्माण, निर्यात, प्रसंस्करण, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड तेल के विपणन में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कंपनियों के करीब 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
सोपा चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण में मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताया। उन्होंने किसानों के हित में भावांतर योजना के महत्व का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सुमित मिश्रा, सोपा के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्णवीर और विजय पाल सहित उद्योग, कृषि और व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।