नई दिल्ली । बीते पांच महीने से लगातार सड़क पर उतरकर मोर्चा खोलने की सलाह देने वाले अभिजीत दीपके ने अचानक अपने समर्थकों से घर में रहने की अपील कर दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर अपने समर्थकों से कुछ समय के लिए परिवार के साथ वक्त बिताने को कहा है। सवाल यह है कि बीते सप्ताह तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर आंदोलन पर अड़े दीपके ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया है?
बता दें कि अभिजीत दीपके की अगुवाई में सीजेपी मई महीने के बाद से ही लगातार प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने सबसे पहले नीट पेपर लीक मुद्दे के खिलाफ आवाज उठाई और जंतर मंतर पर बड़ा आंदोलन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही यह आंदोलन खत्म हुआ, जिसे बड़ी जीत माना गया और दीपके व उनके साथियों का हौसला बढ़ा। इसके बाद सीजेपी लगातार सक्रिय रही। कभी स्कूल ठीक करो अभियान तो कभी आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान शुरू कर पार्टी ने सुर्खियां बटोरीं। सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास ने परिसर में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। दोनों को पहले 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था, जिसे अब 3 दिन और बढ़ा दिया गया है।
16 मिनट के अपने वीडियो संदेश में दीपके आशुतोष रांका और सौरभ दास की अनुपस्थिति पर भावुक हो गए। उन्होंने समर्थकों से कहा कि अगले कुछ दिन अपने परिवार के साथ बिताएं। उन्होंने त्योहारों का हवाला देते हुए कहा कि हाल की घटनाओं के बाद सबके परिजन बहुत चिंतित होंगे और ऐसे में अभी उनके साथ रहना सही होगा। उन्होंने आगे कहा, मैं चाहता हूं कि आप त्योहारों पर अपनों के साथ रहें, लेकिन सौरव और आशुतोष को भी याद रखें, क्योंकि वे अपने परिवार के पास नहीं जा सकते। अब वे ही हमारा परिवार हैं। दीपके के इस संदेश को समझने की कोशिश करें तो इससे इशारा मिलता है कि सीजेपी का आंदोलन दिवाली तक रुक सकता है। इसके पीछे कई वजहें हैं। पहली वजह रांका और दास का जेल में होना माना जा रहा है। दीपके ने खुद एक बयान में बताया है कि सीजेपी के सभी आंदोलनों का खाका आशुतोष रांका और सौरभ दास ही तैयार करते थे। ऐसे में उनके बिना पार्टी कमजोर पड़ गई है। इससे पहले 16 अक्टूबर को पार्टी का तिरंगा मार्च भी बेअसर रहा था। दूसरी बड़ी वजह कॉकरोच आंदोलन की फ्रांस और अल्बानिया जैसे देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों से तुलना है। रिजीम चेंज या सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों को लेकर बवाल मचा हुआ है। एक दल के लगातार हमलों के बाद, हाल ही में एक संगठन के प्रमुख ने भी एक बयान में कहा है कि भारत में नेपाल और बांग्लादेश की तरह सत्ता परिवर्तन की साजिश रची जा रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो सीजेपी खुद को इस तरह के आरोप से दूर रखना चाहती है। एक और वजह यह हो सकती है कि पार्टी समय चाहती है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिवाली तक रांका और दास को जमानत मिल सकती है। ऐसे में दीपके इस समय का इस्तेमाल आगे की रणनीति बनाने के लिए करना चाहते हैं।

