-तमिलनाडु में चावल की कुछ किस्मों के दाम 50 फीसद तक बढ़े
नई दिल्ली । कमजोर मानसून और अल नीनो के संभावित प्रभाव से देश के कई राज्यों में सूखे के हालात गंभीर होते जा रहे हैं। दक्षिण और पश्चिम भारत में पानी की कमी का असर खेती, फसल उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कर्नाटक में करीब 33 प्रतिशत फसल बर्बाद होने का अनुमान है, जबकि तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से धान की खेती का रकबा एक लाख एकड़ से अधिक घट गया है। फसल उत्पादन प्रभावित होने के कारण तमिलनाडु में चावल की कुछ किस्मों के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
कर्नाटक में 240 में से 226 तालुकों को सूखाग्रस्त बताया गया है। राज्य के करीब 94.1 प्रतिशत तालुकों में सूखे की स्थिति दर्ज की गई है। आंध्र प्रदेश में 56.4 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 86.4 प्रतिशत तालुक सूखे की चपेट में बताए गए हैं। तेलंगाना के करीब 45.6 प्रतिशत मंडलों को भी सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इन हालात ने किसानों के सामने सिंचाई, उत्पादन और कर्ज चुकाने की चुनौती बढ़ा दी है।
जलाशयों में पानी की कमी
देश के 178 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता से 31 प्रतिशत कम बताया गया है। पेन्नार नदी बेसिन में 72.3 प्रतिशत और कावेरी बेसिन में 60.5 प्रतिशत पानी की कमी दर्ज की गई है। तमिलनाडु के अलियार जलाशय में पानी का स्तर लगभग शून्य तक पहुंचने की बात कही गई है। तेलंगाना के कुछ प्रमुख बांधों में भी जल भंडारण सामान्य स्तर के आधे से काफी नीचे है। जलाशयों में घटते पानी से पेयजल आपूर्ति के साथ सिंचाई पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसका असर आगामी फसल चक्र और ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका पर पड़ सकता है।
महाराष्ट्र में किसान संकट में
महाराष्ट्र में फसलें सूखने और कर्ज के दबाव के बीच सात दिनों में चार किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। हालांकि, इन घटनाओं के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों का आकलन जरूरी है। कमजोर बारिश के चलते किसानों की आय और कृषि लागत के बीच संतुलन बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।
दुनिया के कई हिस्सों में मौसम की मार
इंडोनेशिया में जंगलों की आग से जनवरी से अब तक करीब 8.95 लाख हेक्टेयर भूमि जलने का दावा किया गया है। सुमात्रा और कालीमंतन में धुएं से बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। प्रशांत महासागर में तूफानी गतिविधियों के बीच कुछ शक्तिशाली चक्रवात भी आए हैं। दूसरी ओर, अटलांटिक महासागर में चक्रवाती गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर बताई गई हैं। चीन और जापान में तूफानों के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है, लेकिन किसी क्षेत्र में सूखे या अत्यधिक बारिश के लिए इसे अकेला जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। स्थानीय मौसम परिस्थितियां, समुद्र के तापमान और अन्य जलवायु कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

