आम निवेशकों के लिए होंगे 25 प्रतिशत शेयर
नई दिल्ली । मोदी सरकार ने चार प्रमुख सरकारी बैंकों सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 प्रतिशत करने की तैयारी कर ली है। इस पहल के तहत इन बैंकों के 25 प्रतिशत शेयर आम निवेशकों और अन्य शेयरधारकों के लिए उपलब्ध हो सकेंगे। यह महत्वपूर्ण कदम बाजार नियामक सेबी के उस अनिवार्य नियम का पालन करने के लिए उठाया जा रहा है, जिसके अनुसार शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत शेयर आम जनता के पास होना आवश्यक है।
फिलहाल, इन बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी काफी अधिक है। इंडियन ओवरसीज बैंक में सरकार के पास लगभग 92.44 प्रतिशत, यूको बैंक में 90.95 प्रतिशत, पंजाब एंड सिंध बैंक में लगभग 93.85 प्रतिशत और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 81.19 प्रतिशत शेयर हैं। सरकार की योजना है कि अगले एक साल में इन बैंकों में आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए। इसके लिए बैंक खुद बाजार से पूंजी जुटा सकते हैं, या सरकार भी ऑफर फॉर सेल के जरिए अपने कुछ शेयर बेच सकती है।
हालांकि, बैंकों ने वित्त मंत्रालय से इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय मांगा है। बैंकों का मानना है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी बेचना आसान नहीं होगा। शेयर बेचने का समय और तरीका अभी अंतिम रूप से तय होना बाकी है। सरकार की हिस्सेदारी घटाने की इस योजना को इन बैंकों के निजीकरण से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जाना चाहिए। हिस्सेदारी बेचने का अर्थ यह नहीं है कि इन बैंकों का मालिकाना हक निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। हालांकि, यह सच है कि सरकारी बैंकों के निजीकरण को लेकर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं, और एक सरकारी थिंक टैंक ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया तथा इंडियन ओवरसीज बैंक का नाम निजीकरण के संभावित विकल्पों के तौर पर सुझाया था, लेकिन इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस कदम से शेयर बाजार में इन बैंकों के शेयरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे आम निवेशकों को इनमें निवेश के अधिक अवसर मिलेंगे। साथ ही, सरकार को भी अपने शेयर बेचने से राजस्व प्राप्त होगा।

