जज रवि कुमार दिवाकर ने 97 हत्या के केस वापस लेने पर उठाए सवाल
-सीआरपीसी की धारा 409 का किया उल्लेख
मुजफ्फरनगर । वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में फैसला सुनाकर चर्चा में आए जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में करीब 10 साल पुराने एनडीपीएस एक्ट के मामले में फैसला सुनाते हुए उन्होंने अपनी अदालत से हत्या के 97 मामलों की पत्रावलियां वापस लिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है, न्यायाधीश का काम न्याय करना है, लेकिन यदि न्यायाधीश के साथ ही अन्याय हो तो वह कहां जाए?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को सुनाए गए फैसले में जज दिवाकर ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी अशोक भारती को दंड से मुक्त कर दिया। उन्होंने लंबे समय से लंबित इस मुकदमे का जिक्र करते हुए हिंदी फिल्म ‘दामिनी’ के चर्चित संवाद ‘तारीख पर तारीख’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह संवाद न्यायालयों से तारीख मिलने और न्याय न मिलने की धारणा को दर्शाता है।
18 अगस्त को वापस ली गई थीं 97 पत्रावलियां
मामला उन 97 हत्या के मामलों से जुड़ा है, जिनकी पत्रावलियां 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने रिकॉल कर ली थीं। जज रवि कुमार दिवाकर ने नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर में पदभार संभाला था। जानकारी के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान उनकी अदालत ने 11 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी अदालत में लंबित हत्या के 97 मामलों की पत्रावलियां वापस ले ली गईं। तत्कालीन जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जज दिवाकर ने अपने फैसले में प्रशासनिक नियंत्रण और न्यायिक दायित्व के बीच संबंध पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाला न्यायाधीश क्या ऐसे आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है, जिसे वह विधि के विपरीत मानता है?
धारा 409 के प्रावधान का किया उल्लेख
फैसले में दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 409 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जिला जज को किसी मामले को रिकॉल करने का अधिकार है। हालांकि, धारा 409(2) के तहत ऐसे मामलों की स्थिति अलग हो सकती है, जिनमें सुनवाई शुरू हो चुकी हो और मामला ‘पार्ट हर्ड केस’ की स्थिति में पहुंच गया हो। जज दिवाकर ने इसी कानूनी स्थिति के संदर्भ में 97 पत्रावलियां वापस लिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

