ईमआरएस योजना में सुधार के लिए सरकार द्वारा एहम उपायों की घोषणा 

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नई दिल्ली (ईएमएस)। अनुसूचित जनजाति के विकास संबंधी सभी नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों के समन्वय के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय नोडल मंत्रालय है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी में लगभग 8.6 प्रतिशत अनुसूचित जनजातियां हैं। वर्ष 2018 में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय लोगों की शिक्षा पर ध्यान दिया। इसके अलावा जनजातीय आबादी के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए नई पहले की गईं तथा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को रेखांकित करने तथा जनजातीय संस्कृति को उजागर करने के लिए संग्रहालय बनाने का फैसला किया गया। इस साल एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूलों के गठन संबंधी प्रमुख योजना को दुरुस्त करने और उसमें सुधार के लिए एक बड़ी पहल की गई, ताकि जनजातीय लोगों तक बेहतर शिक्षा पहुंच सके।
– वर्ष 2018 के दौरान प्रमुख गतिविधियां और उपलब्धियां
जनजातीय कार्य मंत्रालय, शिक्षा, अवसंरचना और आजीविका जैसी विशेष रूप से जनजातीय लोगों के लिए बनाई गई योजनाओं के जरिए अनुसूचित जनजाति के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रयास कर रहा है। सरकार की कामकाज नियमावली के तहत मंत्रालय को अब यह अधिकार मिल गया है कि वह नीति आयोग द्वारा प्रतिपादित कार्य प्रणाली तथा रूपरेखा के आधार पर केन्द्रीय मंत्रालयों की निधि संबंधी “जनजातीय उप-योजना” (अब ‘अनुसूचित जनजाति घटक’) की निगरानी करेगा। लोक सेवा में लगातार सुधार के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय विभिन्न योजनागत पहलों की लगातार समीक्षा करता है। इसमें वे पहलें भी शामिल हैं जिनके तहत छात्रवृत्ति योजनाओँ को युक्तिसंगत बनाया जा रहा है। इनमें डीबीटी प्लेटफॉर्म और एनजीओ अनुदानों के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शामिल हैं।
संदीप/देवेन्द्र/ईएमएम/21/दिसम्बर/२०१८/

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