मां विंध्यवासिनी के मंदिर में जुट रहा अपनी मन्नतें मांगने वालों का मेला –

:: दिन में चार बार आरती एवं तीन बार नूतन श्रृंगार हो रहा देवास नाका स्थित इस मंदिर में : अष्टमी-नवमीं पर होगी विशेष पूजा ::
इन्दौर । वैसे तो मां विंध्यवासिनी का प्रमुख शक्तिपीठ उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर में स्थित है, लेकिन देश में बहुत कम स्थान हैं, जहां मां के भव्य मंदिर बने हुए हैं। इन्हीं में से एक मंदिर वर्ष 2017 में शहर के देवास नाका, निरंजनपुर रोड स्कीम 114 में स्थापित किया गया है। तब यहां प्रज्ञा चक्षु जगदगुरू स्वामी रामभद्राचार्य महाराज स्वयं आए थे और उन्हीं के सानिध्य में यह भव्य मंदिर स्थापित हुआ है।
मंदिर के संस्थापक पं. शिवनारायण पाठक के अनुसार मातारानी के इस मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए आते हैं। इन मन्नत मांगने वालों के लिए मंदिर पर विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि वे कोई नाड़ा, मोली या कलावा बांधकर मन ही मन अपनी मन्नत बोलें और जब मन्नत पूरी हो जाती है, तब वापस आकर मातारानी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भोग अर्पित करते हैं।
यहां विशेष रूप से संतान प्राप्ति, विवाह में बाधा, बेरोजगारी, कारोबार में नुकसान, शत्रु बाधा, गृह कलह, संपत्ति विवाद और अन्य सभी तरह की समस्याओं का निदान भक्तों को मिलता है। नवरात्रि में यहां प्रतिदिन सुबह 7 बजे, 12 बजे शाम 7 बजे और रात 10 बजे, चार बार आरती होती है, वहीं तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को मातारानी का नूतन श्रृंगार भी होता है। यहां मां विंध्यवासिनी की दिव्य प्रतिमा रजत मंडित शेर पर सवार रूप में स्थापित की हुई है। भक्त मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचकर मातारानी की पूजा-अर्चना कर भोग समर्पित करते हैं।
इसके अलावा भक्तों के लिए यहां विद्वान पंडितों के निर्देशन में मातारानी की प्रसन्नता के लिए यज्ञ-हवन, जाप एवं अन्य अष्ठान भी संपादित किए जाते हैं। मंदिर का परिसर और मैदान इतना वृहद है कि एक समय में यहां 5 हजार श्रद्धालु आराधना कर सकते हैं। पं. पाठक मूलतः उत्तरप्रदेश के ही हैं और उनके परिवार पर मातारानी का ईष्ट बना हुआ है। इसीलिए उन्होंने इन्दौर में इस मंदिर का निर्माण कर मातारानी की दिव्य प्रतिमा स्थापित कराई है। पं. विनय पाठक एवं पं. अभिनव पाठक इस मंदिर में पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
चैत्र नवरात्रि के अलावा पूरे वर्षभर यहां नियमित अनुष्ठान होते रहते हैं। मंदिर पर देवास नाका क्षेत्र के अलावा आसपास के गांवों के भी श्रद्धालु नियमित रूप से आते हैं। अब अष्टमी एवं नवमीं अर्थात 5 एवं 6 अप्रैल को विशेष अनुष्ठान एवं श्रृंगार दर्शन होंगे।