साहित्य

पुस्तक समीक्षा

मन के झरोखे से जीवन की सार्थकता निहारता कविता-संग्रह ‘पानी पर लकीरें’ ‘पानी पर लकीरें’ कविता-संग्रह सारिका-मुकेश का प्रथम काव्य-संकलन है। भावुक मन की संवेदनशीलता लिये यह संग्रह जीवन की अनेक स्थितियों को उजागर करता हुआ मानवीय सरोकारों और संस्कारों की प्रौढ़ता को रेखांकित करता है। इस काव्य संकलन की कविताओं में पाठक के मन […]

साहित्य

सदमा

आज दिन बहुत  बढ़िया बीता,बिट्टू को उसके स्कूल मे ड्राईंग प्रतियोगिता मे प्रथम पुरस्कार मिला,रूनझुन स्कूल मे डान्स प्रतियोगिता मे सैकेण्ड रही।यूँ तो नीता के दोनो बच्चे होशियार है।खुशी इस बात की थी की एक ही दिन दोनो को अपने अपने स्कूल मे सम्मानित भी किया गया।इसी बात पर  प्रकाश ने परिवार को ग्रैंड होटल […]

साहित्य

कहानी

सुकून! रात के करीब दस बजने को थे। आज मौसम ने अचानक ही करवट बदल ली। आसमान में बिजलियाँ कड़क रही थीं। जिस वजह से बारिश होने के पूरे आसार थे। हाथ में शराब की बोतल लिए एक निजी कंपनी में काम करने वाला संदीप लड़खड़ाता हुआ अपने घर को जा रहा था। वह हमेशा […]

साहित्य

लघुकथा

प्रेम का सौदा “नीना, दिलीप आ रहा है,बिंदू के साथ कल सुबह ही,।बिन्दु से उसने शादी कर ली है।”जैसे ही पति देव ने ये सूचना दी ।मेरे हाथों से चाय का बरतन छूटते छूटते बचा ।”हे भगवान,बिन्दु के सातो भाई भी तो नहीं धमक पड़ेंगे लाठी बल्लम लेके हमारे यहाँ ।”मैने पूछा “अरे अब शादी […]

साहित्य

अधर्मी

“वाह यारो आज की पार्टी में तो मज़ा ही आ गया। पुरा स्टाफ़ एकसाथ हैं। बस एक वो मूर्ख को छोड़कर..!” (किसी सरकारी विभाग के कर्मचारियों की साँझा पार्टी चल रही थी।  सिगरेट, शराब, अश्लील हॅसी मज़ाक में समय का पता ही नही चला। रात के 11 बज रहे थे। कलेक्टर महोदय के आदेशानुसार शहर […]

साहित्य

श्मशान घाट

      कलुआ और उसके कुनबे के सभी नेटुए गाँव से लगभग बाहर दक्षिण-पश्चिम किनारे पर कच्चे,  और फूस की झोपड़ियों में या त्रिपाल लगाकर रहते हैं,सरकार ने उनकी इस बस्ती में एक हैंडपंप लगवा दी है,उसी का ही ये पानी पीते हैं और अपने तथा आस-पास के गाँवों में अपना जादू-करतब दिखाकर,ऊँचे पेड़ों से मधुमक्खियों […]

साहित्य

लघुकथा

निमित्त मात्र* “नीरु…ये लो गोखरू का कांटा… इसे चार लीटर पानी में डालकर तब तक उबालना जब तक यह पानी एक लीटर बचे….” सुहास ने अपनी पत्नी से कहा। “पता है मुझे… आप कोई पहली बार तो नहीं बनवा रहे हैं ये काढा… अब किसके लिए…? नीरु ने सुहास से पूछा। “अरे यार… हमारे ऑफिस […]

साहित्य

।।अजब गांव की गजब कहानी।।

अजब ग्राम पंचायत को सन् 1955 में निजाम पं. से अलग कि। अजब ग्राम पंचायत में दो बङे गांव हैं अजब व गजब तथा एक नवीनतम सुंदर व छोटा गांव विष्णु धोरा। 25 वर्षों तक अच्छे खानदान ने राज किया( सरपंच )रहे गांव की पूरे भारत में पहचान थी ।उस खानदान में 4 लोग सरपंच […]

साहित्य

लघुकथा:

 “मोक्ष” मां, मां आज कौन आ रहा है? इतने सारे पकवान किसके लिए बना रही हो? प्रश्नों की झड़ी लगाते हुए छोटा सा वासु सुधा से पूछे जा रहा था। बेटा तेरी दादी के लिए,, सुधा ने उत्तर दिया।। क्या!! दादी आनेवाली हैं,,वासु बहुत खुश था। पापा चलो ओल्ड एज होम दादी को लेने चलते […]

साहित्य

क्या अपना

रात के नौ बज रहे थे। यूं तो शहरी जीवन के अनुसार अभी शाम ही थी, पर अस्पताल के बीमार माहौल के लिए यह गहराती रात का पहला प्रहर था। डॉक्टर का राउंड, नर्सों की बुखार-ब्लडप्रेशर की चेकिंग, दवाओं तथा इंजेक्सन का वितरण हो चुका था। घरवालों का अपने मरीजों से मिलने का समय भी […]