नई दिल्ली । दिल्ली का ‘कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्प्शन’ भारतीय राजधानी के सबसे पुराने और ऐतिहासिक ईसाई गिरिजाघरों में से एक है। इस आमतौर पर वायसराय चर्च के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसकी नींव रखी थी और नियमित रूप से प्रार्थना करने आते थे। यह चर्च लुटियंस दिल्ली में मौजूद है, जो राष्ट्रपति भवन और संसद भवन के पास है, और उत्तर भारत के चर्च के दिल्ली डायोसीज का मुख्य कैथेड्रल भी है।
इस चर्च का निर्माण 1900 के आसपास तब आवश्यकता से शुरू हुआ, जब ब्रिटिश शासन ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया। ब्रिटिश अधिकारियों और इंग्लैंड से आए उच्च स्तरीय अधिकारियों की धार्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एक भव्य चर्च का विचार रखा गया। इसके लिए तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने 1927 में इसकी नींव रखी।
कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्प्शन’ का डिजाइन ब्रिटिश आर्किटेक्ट हेनरी अलेक्जेंडर नेसबिट मेड ने तैयार किया था। इसका निर्माण वेनिस के चर्च ऑफ इल रेडेंटोर से प्रेरित था और लुटियंस दिल्ली की वास्तुकला शैली में पूरी तरह फिट बैठता है। चर्च का निर्माण 1927 से 1935 तक चला, लेकिन इसे 18 जनवरी 1931 को सार्वजनिक पूजा के लिए खोला गया और 15 फरवरी 1931 को लाहौर के बिशप ने इसे औपचारिक रूप से समर्पित किया। यह चर्च धौलपुर के सफेद और लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। इसकी वास्तुकला में ऊंचे मेहराब, गुंबददार छत और अच्छी वेंटिलेशन शामिल है, जो गर्मियों में भी ठंडक बनाए रखती है। चर्च के अंदर 1931 का ऐतिहासिक पाइप ऑर्गन है और विभिन्न धार्मिक पेंटिंग्स इसकी भव्यता को बढ़ाती हैं।
1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद यह चर्च ‘चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया’ (सीएनआई) के दिल्ली डायोसीज का हिस्सा बन गया। हालांकि यह चर्च औपनिवेशिक विरासत का प्रतीक है, लेकिन अब यह विविध समुदाय का आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। यहां क्रिसमस और ईस्टर जैसे पर्वों पर विशेष उत्सव आयोजित किए जाते हैं।
हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिसमस के अवसर पर इस चर्च में प्रार्थना सभा में भाग लिया। सभा में भजन और क्रिसमस कैरोल्स गाए गए और दिल्ली के बिशप राइट रेवरेंड डॉ. पॉल स्वरूप ने प्रधानमंत्री के लिए विशेष प्रार्थना की। दिल्ली और उत्तर भारत से बड़ी संख्या में ईसाई श्रद्धालु इस अवसर पर गिरिजाघर में जुटे। कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्प्शन न केवल दिल्ली की औपनिवेशिक और वास्तुकला विरासत का प्रतीक है, बल्कि आज यह एक जीवंत आध्यात्मिक स्थल भी है। इसकी भव्य संरचना, ऐतिहासिक पाइप ऑर्गन और धार्मिक महत्व इसे राजधानी दिल्ली के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में से एक बनाते हैं।

