इंदौर में नर्मदा जल बना काल : 70 से ज्यादा बीमार, 3 की मौत से हड़कंप, मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान

इंदौर

मातम में बदली खुशियां : स्वच्छता के सिरमौर शहर में सरकारी तंत्र की बड़ी चूक ::
इन्दौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में मंगलवार को उस समय मातम पसर गया जब सरकारी नलों से होने वाली जलापूर्ति अचानक जानलेवा साबित हुई। दूषित और बदबूदार पानी पीने से एक ही इलाके के 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए, जबकि स्थानीय पार्षद और परिजनों ने तीन बुजुर्गों की मौत का दावा कर सनसनी फैला दी है। इस हृदयविदारक घटना ने राजधानी भोपाल तक हलचल मचा दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सभी पीड़ितों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन करने की बड़ी घोषणा की है।
:: अपनो को खोने का दर्द : कड़वे पानी ने छीनीं तीन जिंदगियां ::
क्षेत्रीय रहवासियों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से नलों में आने वाले पानी का स्वाद बेहद कड़वा था और उसमें से तीखी गंध आ रही थी, जिसकी शिकायत के बावजूद प्रशासन ने समय रहते सुध नहीं ली। देखते ही देखते नंदलाल पाल, सीमा प्रजापत और उर्मिला यादव की तबीयत बिगड़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया। हालांकि प्रशासन अभी इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही करने की बात कह रहा है, लेकिन क्षेत्र में गहरा आक्रोश व्याप्त है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
:: ग्राउंड जीरो पर मंत्री : विजयवर्गीय बोले- दोषियों की जगह सलाखों के पीछे होगी ::
संकट की गंभीरता को देखते हुए नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वयं प्रभावित गलियों का दौरा कर पीड़ितों का दर्द साझा किया और अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल तकनीकी खराबी नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का चरम है। वहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने मंगलवार आधी रात को ही कमान संभालते हुए पूरे क्षेत्र की पाइपलाइनों की जांच शुरू करवा दी है।
:: पाइपलाइन से जलप्रदाय पूरी तरह बंद ::
वर्तमान में भागीरथपुरा में पाइपलाइन से जलप्रदाय पूरी तरह बंद कर दिया गया है और 50 से अधिक टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जा रहा है। निगमायुक्त ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में आपात बैठक कर पेयजल लाइनों की डिजिटल मैपिंग के निर्देश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रेनेज का गंदा पानी किस बिंदु से सप्लाई लाइन में मिल रहा है। टॉर्च और मशीनों की मदद से तकनीकी अमला रात भर लीकेज ढूंढने में जुटा रहा।
:: टैंकरों के भरोसे प्यास : घर-घर पहुंचीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें ::
इलाके में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। घर-घर जाकर ओआरएस पैकेट और क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं, साथ ही मुनादी के जरिए लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस पूरी त्रासदी की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और पेयजल के 34 सैंपल लैब भेजे गए हैं जिनकी रिपोर्ट अगले 48 घंटों में आने की संभावना है।