:: संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने संभाली कमान; 80 ट्यूबवेलों का क्लोरीनेशन, स्थिति सामान्य होने तक जल आपूर्ति पर रोक ::
इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से उपजी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के बाद प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। शनिवार को संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के साथ मैसिव रिंग सर्वे अभियान की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में जब तक पानी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक जल प्रदाय पूरी तरह बंद रहेगा। संक्रमण के मूल कारणों की वैज्ञानिक जांच के लिए भोपाल के साथ-साथ कोलकाता से विशेष विशेषज्ञ दल इंदौर पहुंच चुके हैं।
:: युद्धस्तर पर शुद्धिकरण कार्य ::
संभागायुक्त ने बताया कि शनिवार को दिन भर में प्रभावित क्षेत्र के 80 से अधिक ट्यूबवेलों का क्लोरीनेशन किया गया। इन जल स्रोतों की निरंतर टेस्टिंग की जाएगी। प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है। डॉ. खाड़े ने कहा, हम केवल तात्कालिक समाधान नहीं, बल्कि स्थायी प्रबंधन पर काम कर रहे हैं। कोलकाता और भोपाल के विशेषज्ञों की वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद भविष्य के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाएगी ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
:: मैदान में उतरा प्रशासनिक अमला ::
देर शाम संभागायुक्त डॉ. खाड़े स्वयं अधिकारियों की फौज के साथ प्रभावित क्षेत्र की तंग गलियों में पहुंचे। उन्होंने न केवल जलापूर्ति की टंकियों का भौतिक सत्यापन किया, बल्कि क्षेत्रीय निवासियों से चर्चा कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ कलेक्टर शिवम वर्मा और नवागत नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने पाइपलाइनों के लीकेज और क्रॉस-कनेक्शन की संभावनाओं को लेकर तकनीकी टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
:: मरीजों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग ::
प्रशासन ने प्रभावितों की देखभाल के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया है। प्रत्येक मरीज की सेहत की रिपोर्ट लेने के लिए अलग से टीमें तैनात की गई हैं। जो मरीज गंभीर स्थिति में हैं, उन्हें तत्काल बेहतर सुविधाओं वाले अस्पतालों में शिफ्ट किया जा रहा है। समीक्षा बैठक में अपर आयुक्त आशीष कुमार पाठक, आकाश सिंह, प्रखर सिंह, स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन और सीएमएचओ डॉ. माधव हासनानी सहित स्वास्थ्य और निगम के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

