विदेशों में भी बढ़ रहा हिन्दी का वर्चस्व
जबलपुर, । प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय महाकौशल महाविद्यालय, जबलपुर में शनिवार को विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी का विषय वैश्विक परिदृश्य में हिन्दी : भाषा, साहित्य और तकनीक रखा गया था, जिसका संचालन हाइब्रिड मोड यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दी भाषा के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और आधुनिक तकनीक के साथ इसके सामंजस्य पर चर्चा करना था, जिसकी रूपरेखा संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण शुक्ल ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नीदरलैंड्स से जुड़ीं वैश्विक हिन्दी संगठन की अध्यक्ष और काशी विद्यापीठ की पूर्व प्रोफेसर डॉ. पुष्पिता अवस्थी उपस्थित रहीं, जिन्होंने हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य में बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। वहीं, मुख्य वक्ता के रूप में अजमेर (राजस्थान) के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. संदीप अवस्थी ने हिन्दी साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विदेशों में अब हिन्दी केवल बोलचाल ही नहीं, बल्कि रोजगार की भाषा के रूप में भी अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है। यूएई से ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं डॉ. निशा गिरी ने मातृभाषा के सम्मान और एआई सहित विविध तकनीकी टूल्स में हिन्दी के बढ़ते प्रयोग की जानकारी दी। संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में शिक्षा और साहित्य जगत के विद्वानों द्वारा लगभग 20 शोध पत्रों का वाचन ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में किया गया। शोध पत्र पढ़ने वालों में डॉ. अमिता घोसले, डॉ. विनोद कुमार सुनार, डॉ. ललिता गोयल और अन्य शोधार्थी शामिल थे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपने उद्बोधन में भाषाई विविधता पर प्रकाश डाला और हिन्दी के शुद्ध प्रयोग पर विशेष बल दिया।

