पशुपतिनाथ के दरबार में उमड़ी इंदौर की भक्ति, 250 श्रद्धालुओं ने सुनी भागवत कथा

धार्मिक

:: बाधाओं के बाद भी पूरा हुआ संकल्प : देश में सुख-शांति के लिए पशुपतिनाथ से की सामूहिक प्रार्थना ::
इंदौर। नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में इंदौर के श्रद्धालुओं ने भक्ति का नया इतिहास रचा है। विद्याधाम के महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती की प्रेरणा से यहाँ आठ दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। भागवताचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री के मुखारविंद से कथा सुनने के लिए इंदौर और मालवा के करीब 250 भक्त काठमांडू पहुंचे। नए साल के मौके पर हुए इस आयोजन में भक्तों ने भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन किए और भारत में सुख-शांति व भाईचारे के लिए विशेष प्रार्थना की।
:: मंदिर के मुख्य पुजारी ने भी सुनी कथा ::
आयोजन की शुरुआत एक सुंदर शोभा यात्रा के साथ हुई। खास बात यह रही कि पशुपतिनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी नारायण गुरु स्वयं कथा सुनने पहुंचे। उन्होंने व्यास पीठ की पूजा की और इंदौर से आए सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया। कथा को विधि-विधान से पूरा करने के लिए इंदौर से 23 पंडितों की टीम भी वहां गई थी। इन आठ दिनों में कथा के साथ-साथ हर दिन पार्थिव शिवलिंग पूजा, रुद्राभिषेक और कन्या पूजन जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी किए गए। भक्तों ने भगवान को छप्पन भोग भी लगाए।
:: हिंसा भी नहीं रोक पाई भक्तों का रास्ता ::
यह कथा पहले सितंबर महीने में होनी थी, लेकिन उस समय काठमांडू में दंगे और हिंसा होने के कारण इसे टालना पड़ा था। उस समय कई भक्तों को होटलों में ही फंसे रहना पड़ा था और कई लोग आधे रास्ते से वापस लौट आए थे। लेकिन भक्तों की आस्था कम नहीं हुई और अब दोबारा दोगुने उत्साह के साथ इस यात्रा को पूरा किया गया। आयोजन की जिम्मेदारी संभालने वाले पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि सरकार और साथियों के सहयोग से यह संकल्प अब सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।
:: इंदौर जैसा रहा खान-पान और माहौल ::
काठमांडू में रहने और खाने-पीने की सभी व्यवस्थाएं इंदौर के ही सेवादारों ने संभाली थीं, जिससे श्रद्धालुओं को वहां भी अपने घर जैसा माहौल मिला। कृष्णा सिंह पटेल, सुनील शर्मा, चयन अग्रवाल और उनकी टीम ने सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखीं। काठमांडू से लौटकर आए यात्रियों का इंदौर में भव्य स्वागत किया गया। पं. राहुल कृष्ण शास्त्री अब तक देश-विदेश के प्रमुख तीर्थों पर 100 से अधिक ऐसी कथाएं संपन्न करा चुके हैं।