एथलीट स्वप्ना बर्मन को पहनाया मेयर के गले से उतारकर स्कार्फ, बीजेपी हमलावर

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-सीएम ममता पर लगाया खिलाड़ी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का आरोप
नई दिल्ली । बंगाल में विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले टीएमसी और बीजेपी एक दूसरे को सियासी चक्रव्यूह में फंसाने की कोशिश कर रही हैं। हर छोटे मुद्दे को सियासी रंग देकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की हो रही है। वहीं अब बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक बार फिर पश्चित बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने सीएम ममता पर गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को सार्वजनिक रूप से अपमान करने का आरोप लगाया है।
मालवीय ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी ने भारत की स्वर्ण पदक विजेता एथलीट स्वप्ना बर्मन का सार्वजनिक रूप से अपमान किया है। वहां औपचारिक स्कार्फ की कोई कमी नहीं थी। फिर भी, सीएम ममता ने सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब द्वारा पहले से ही पहने हुए स्कार्फ को उतारकर स्वप्ना बर्मन के गले में डाल दिया। यह न केवल अनुचित था, बल्कि अपमानजनक भी था। स्वप्ना बर्मन एक चैंपियन हैं जिन्होंने देश को गौरवान्वित किया है। वे सम्मान और गरिमा की हकदार हैं, न कि इस तरह के अपमानजनक की।
इस बीच बंगाल बीजेपी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर सीएम ममता की करीबी प्रियदर्शनी हकीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पोस्ट में लिखा गया है कि कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम की बेटी और सीएम ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी प्रियदर्शनी हकीम, वार्ड 82 की निवासी होने के बावजूद वार्ड 77 स्थित एसआईआर सुनवाई केंद्र के अंदर क्यों घूमती नजर आईं?
वह वहां किस आधिकारिक हैसियत से मौजूद थीं? और इससे भी अहम बात यह है कि वह एसआईआर सुनवाई के लिए बुलाए गए व्यक्तियों से बातचीत क्यों कर रही थीं? एसआईआर सुनवाई केंद्र पार्क, पिकनिक स्थल या राजनीतिक अड्डा नहीं हैं। ये वैधानिक स्थान हैं जो विशेष रूप से चुनावी सत्यापन के लिए बने हैं। किसी भी अनाधिकृत उपस्थिति से गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।
क्या वह ईआरओ और एईआरओ को प्रभावित करने या डराने की कोशिश कर रही थीं? क्या अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए दबाव डाला जा रहा था? उनके पिता की राजनीतिक संबद्धता और सार्वजनिक रूप से ज्ञात विचारों को देखते हुए।
वह किस अधिकार के तहत एसआईआर सुनवाई केंद्र के अंदर मौजूद थीं? चुनावी निष्पक्षता के इस घोर उल्लंघन की अनुमति किसने दी? चुनाव आयोग को जवाब देना होगा। राजनीतिक विशेषाधिकार से लोकतंत्र से समझौता नहीं किया जा सकता।