नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की यात्रा पर आधारित फिल्म ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ न केवल अपने विषय के कारण, बल्कि तथ्यों के प्रति प्रतिबद्धता और वैचारिक ईमानदारी के चलते भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार फिल्म निर्माताओं ने गहन ऐतिहासिक समीक्षा और विशेषज्ञों से परामर्श के बाद फिल्म की अवधि घटा दी। यह निर्णय ऐसे कुछ सीन्स को हटाने के बाद लिया गया, जिनके लिए पर्याप्त ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
फिल्म के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणीसदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा, “आज के समय में जब विचारधारा के नाम पर तथ्यों से समझौता होते देखा जाता है, ‘शतक’ के निर्माताओं ने यह साबित किया है कि संघ के लिए सत्य और तथ्य सर्वोपरि हैं।”
डॉ. वैद्य ने बताया कि फिल्म को जब इतिहासकारों और विषय विशेषज्ञों द्वारा फैक्ट-चेक किया गया, तो कुछ प्रसंगों पर पुनर्विचार किया गया, और तत्पश्चात फ़िल्म की अवधि कुछ कम करने का निर्णय लियागया। उन्होंने कहा “कुछ दृश्य भावनात्मक रूप से प्रभावशाली थे, लेकिन उनके पीछे ठोस ऐतिहासिक आधार नहीं था। ऐसे में बिना किसी दबाव के उन्हें हटाने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय संघ की पारदर्शी सोच और साफ छवि को भी दर्शाता है।”
फिल्म से जुड़े निर्माताओं ने कई बैठकों के बाद यह स्पष्ट रूप से तय किया कि रचनात्मकता जरूरी है, लेकिन इतिहास की मर्यादा बनाए रखना उससे भी अधिक जरूरी है। इसी विचार के आधार पर कुछ कंटेंट हटाया गया। डॉ. वैद्य ने आगे कहा, “यह फिल्म किसी प्रकार का प्रचार नहीं, बल्कि एक परिचय है। संघ की यात्रा को समाज के सामने ईमानदारी से रखने का माध्यम है। इसलिए इसमें वही दिखाया जाना चाहिए जो तथ्यात्मक रूप से सही हो।”
‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ फिल्म राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर उसके निरंतरसामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विकास को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करती है। फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि कहानी को प्रभावी और रोचक बनाने के लिए जहां आवश्यक हुआ, वहां कलात्मक स्वतंत्रता ली गई है, लेकिन तथ्यों के स्तर पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया।
आज जब कई बायोपिक और विचार प्रधान फिल्मों पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे समय में ‘शतक’ का यह निर्णय इसे एक जिम्मेदार और भरोसेमंद फ़िल्म के रूप में स्थापित करता है। यहाँयह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ‘शतक’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि संघ के सौ वर्षों की यात्रा को ईमानदारी और संतुलन के साथ समझाने का प्रयास है।
‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ फिल्म 19 फरवरी से देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।

